पौधे को बनाया गुरु दक्षिणा का प्रतीक।फीस की जगह पौधा, शिक्षा के साथ हरियाली का संदेश।बीएसएस क्लब में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल, यहां से पढ़े कई छात्र सरकारी सेवा में।
छौड़ाही।आमतौर पर शिक्षा हासिल करने के बाद विद्यार्थी अपने गुरु को सम्मान स्वरूप दक्षिणा देते हैं,लेकिन पर्यावरण संरक्षण को जीवन का संकल्प बना चुके राजेश कुमार सुमन ने गुरु दक्षिणा की इस परंपरा को एक नई दिशा दी है।उनके बीएसएस क्लब में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों से शुल्क के रूप में पैसे के बजाय फलदार पौधा लिया जाता है।इसके माध्यम से शिक्षा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है।
राजेश कुमार सुमन का मानना है कि शिक्षा का मकसद केवल रोजगार हासिल करना नहीं,बल्कि विद्यार्थियों में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है।इसी सोच के तहत बीएसएस क्लब में विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है।आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद बच्चों को भी यहां आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। संस्था से शिक्षा प्राप्त कर कई विद्यार्थी वर्तमान में विभिन्न सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।गुरु दक्षिणा में मिलने वाले पौधों को विद्यार्थियों के माध्यम से रोपित कराया जाता है। साथ ही उन्हें पौधे की नियमित देखभाल के लिए भी प्रेरित किया जाता है। राजेश कहते हैं कि एक विद्यार्थी जब अपने हाथों से फलदार पौधा लगाता है तो वह सिर्फ एक पौधा नहीं लगाता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली और पर्यावरण संरक्षण की नींव रखता है।उनका पौधरोपण अभियान बीएसएस क्लब तक सीमित नहीं है।छौड़ाही प्रखंड के विभिन्न गांवों के अलावा सीमावर्ती समस्तीपुर जिले और राज्य के अन्य क्षेत्रों में भी वे लोगों के जन्मदिन,शादी की सालगिरह,बेटी के जन्मोत्सव,विवाह एवं अन्य मांगलिक अवसरों पर पौधे भेंट करते हैं।नवदंपती और परिवार के सदस्यों को फलदार पौधा देकर वे खुशियों को प्रकृति से जोड़ने का संदेश देते हैं।राजेश का प्रयास है कि किसी खास अवसर की याद महज समारोह या उपहार तक सीमित न रहे।उस अवसर पर लगाया गया पौधा वर्षों तक बढ़ता रहे और परिवार के साथ समाज को भी फल,छाया और स्वच्छ पर्यावरण देता रहे।शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने की यह पहल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

