Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » झारखंड में ओपन जेल योजना: मानवीय दृष्टिकोण से कैदियों का पुनर्वास
    Headlines अपराध खबरें राज्य से झारखंड मेहमान का पन्ना हजारीबाग

    झारखंड में ओपन जेल योजना: मानवीय दृष्टिकोण से कैदियों का पुनर्वास

    Devanand SinghBy Devanand SinghJuly 25, 2026No Comments4 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    झारखंड में ओपन जेल
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    लेखक: महेन्द्र तिवारी

    झारखंड में ओपन जेल की स्थापना: एक ऐतिहासिक कदम

    झारखंड में ओपन जेल की स्थापना भारतीय कारा व्यवस्था में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक परिवर्तन का संकेत है। सदियों से जेलों का मुख्य उद्देश्य केवल अपराधियों को समाज से अलग रखकर उन्हें कठोर दंड देना माना जाता रहा है। लेकिन आधुनिक न्याय व्यवस्था का दृष्टिकोण अब इस संकीर्ण सोच से काफी आगे निकल चुका है। आज की न्याय प्रणाली यह मानती है कि अपराध करने वाले व्यक्ति को केवल सजा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सुधारकर समाज का एक जिम्मेदार नागरिक बनाना अधिक आवश्यक है। इसी सुधारात्मक सोच के आधार पर ओपन जेल की अवधारणा का विकास हुआ है। हाल ही में झारखंड सरकार ने हजारीबाग केंद्रीय कारागार से इस नई व्यवस्था की शुरुआत करने का सराहनीय निर्णय लिया है। इसके तहत चुने गए बंदी अपने परिवार के साथ स्वतंत्र रूप से रह सकेंगे, दिन के समय रोजगार के लिए बाहर जा सकेंगे और शाम ढलने पर वापस ओपन जेल लौट आएंगे।

    हजारीबाग में 32 एकड़ पर बनेगी 100 आवासीय फ्लैटों वाली जेल

    हजारीबाग में लगभग 32 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित इस ओपन जेल में 100 आवासीय फ्लैटों का निर्माण किया जाना है। इस जेल में केवल उन चुनिंदा बंदियों को रखा जाएगा जिनका आचरण उत्कृष्ट रहा है, जिन्होंने अपनी सजा का बड़ा हिस्सा पूरा कर लिया है और जिनसे समाज को कोई सुरक्षा जोखिम नहीं है। इन चयनित बंदियों को अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहने की पूरी सुविधा मिलेगी। वे सुबह काम के लिए बाहर जाएंगे और निर्धारित समय पर वापस लौटेंगे। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बंदियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना, परिवार के साथ उनके संबंधों को बचाए रखना और समाज में उनके पुनर्वास को सहज बनाना है। हजारीबाग की इस शुरुआत के बाद राज्य के अन्य शहरों जैसे रांची, दुमका, पलामू और जमशेदपुर में भी ऐसी ही व्यवस्था विकसित करने की योजना है।

    भारत के अन्य राज्यों में सफल संचालन

    ओपन जेल का यह विचार नया नहीं है। भारत में राजस्थान, महाराष्ट्र और केरल सहित कई राज्यों में इनका सफल संचालन हो रहा है। राजस्थान की सांगानेर और उदयपुर जैसी खुली जेलों के बेहतरीन उदाहरण हमारे सामने हैं, जहां कैदी खेती और मजदूरी से अपनी आजीविका सम्मानपूर्वक अर्जित करते हैं। व्यावहारिक अनुभव बताते हैं कि जिन बंदियों पर विश्वास किया जाता है और उन्हें जिम्मेदारी सौंपी जाती है, उनमें दोबारा अपराध करने की संभावना बहुत कम हो जाती है। भारतीय संविधान प्रत्येक व्यक्ति को गरिमापूर्ण जीवन जीने का मौलिक अधिकार देता है। जेल में बंद व्यक्ति अपने कुछ अधिकारों से वंचित अवश्य होता है, लेकिन एक इंसान के रूप में उसका मानवाधिकार समाप्त नहीं होता। खुली जेल की अवधारणा विश्व स्तर पर मान्य है।

    पारिवारिक संबंध और जेलों की भीड़ कम करना

    परिवार किसी भी व्यक्ति के जीवन का सबसे मजबूत आधार होता है। सामान्य जेलों में लंबे समय तक परिवार से दूर रहने पर कई गंभीर मानसिक और सामाजिक समस्याएं जन्म लेती हैं। ओपन जेल इस दूरी को काफी हद तक समाप्त कर देती है। जब बंदी अपने परिवार के साथ रहता है और स्वयं मेहनत करके परिवार की आर्थिक मदद करता है, तब उसके भीतर समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव पैदा होता है। रोजगार से प्राप्त आय व्यक्ति में आत्मसम्मान जगाती है। इसके अलावा, भारत की जेलों में क्षमता से अधिक भीड़ की जो एक बहुत बड़ी समस्या है, उसे कम करने में भी यह व्यवस्था बेहद कारगर साबित होगी। अच्छे कैदियों को खुली जेल में भेजने से बंद जेलों का भारी दबाव घटेगा।

    चुनौतियां और आगे का रास्ता

    हालांकि इस राह में उपयुक्त बंदियों के निष्पक्ष चयन और उनके लिए रोजगार जुटाने जैसी बड़ी चुनौतियां भी मौजूद हैं। यदि चयन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी नहीं होगी, तो पूरी व्यवस्था पर सवाल उठेंगे। अपराधियों के प्रति समाज की नकारात्मक मानसिकता को बदलना भी आवश्यक है। आधुनिक तकनीकों जैसे डिजिटल उपस्थिति और जैविक पहचान प्रणाली के सहारे इसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। यह सुविधा कोई विशेषाधिकार नहीं बल्कि अच्छे आचरण से कमाया गया अवसर है। यदि झारखंड में पारदर्शी चयन और समाज की सकारात्मक भागीदारी सुनिश्चित होती है, तो यह पहल पूरे देश के लिए कारागार सुधार का एक बेहतरीन आदर्श मॉडल बन सकती है।

    ओपन जेल कारा सुधार पुनर्वास हजारीबाग
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleझारखंड में ओपन जेल की स्थापना: मानवीय दृष्टिकोण से सुधार की नई पहल
    Next Article बंगाल में नीट हिंसा पर पहली बार गुंडा अधिनियम का उपयोग, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दी कड़ी सजा की चेतावनी

    Related Posts

    भाजपा नेता अमरप्रीत सिंह काले के बड़े भाई त्रिलोचन सिंह का निधन, शोक की लहर

    September 13, 2026

    यूपी के देवरिया में पुलिस मुठभेड़ में दो हत्यारोपित गिरफ्तार, मुख्य आरोपी के पैर में लगी गोली

    September 13, 2026

    ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की गूंज: वाशिंगटन से इस्लामाबाद तक खलबली, जानें भारत की कूटनीतिक जीत

    September 12, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    भाजपा नेता अमरप्रीत सिंह काले के बड़े भाई त्रिलोचन सिंह का निधन, शोक की लहर

    यूपी के देवरिया में पुलिस मुठभेड़ में दो हत्यारोपित गिरफ्तार, मुख्य आरोपी के पैर में लगी गोली

    ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की गूंज: वाशिंगटन से इस्लामाबाद तक खलबली, जानें भारत की कूटनीतिक जीत

    ब्रिक्स में भारत का बढ़ता कद, ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ ने दिया वैश्विक नेतृत्व का संदेश

    पर्युषण महापर्व : आत्मशुद्धि से आत्मजागरण की ओर

    यूसीआईएल जादूगोड़ा माइंस की ठेका व्यवस्था पर सवाल, जांच की मांग

    अबुआ मित्र’ व्हाट्सऐप चैटबोट से आसान होगा जन शिकायतों का समाधान 15 सितंबर को उपायुक्त राजीव रंजन करेंगे सेवा का शुभारंभ, जारी होगा व्हाट्सऐप नंबर

    नुतन्डीह में सरकारी जमीन पर कब्जा: ग्रामीणों की बैठक आज, विक्रेताओं को धमकी और कार्रवाई की मांग

    निखार हत्याकांड: ‘वर्दी’ पर शक गहराया, कोलकाता से दो गिरफ्तार

    दुर्गा पूजा की तैयारियों को लेकर 327 समितियों की आमसभा

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.