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    Home » स्वतंत्रता सेनानी स्मृतिशेष भूल्लर ठाकुर की प्रतिमा अनावरण के बहाने
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    स्वतंत्रता सेनानी स्मृतिशेष भूल्लर ठाकुर की प्रतिमा अनावरण के बहाने

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarNovember 12, 2025No Comments5 Mins Read
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    स्वतंत्रता सेनानी स्मृतिशेष भूल्लर ठाकुर की प्रतिमा अनावरण के बहाने

    जब लालगंज और हाजीपुर के अंग्रेज अधिकारी हुए थे आग बबूला

    राष्ट्र संवाद डेस्क

    वैशाली जिले के मानपुरा स्थित राजकीय मध्य विद्यालय मानपुरा पूर्वी में उसी मिट्टी के सपूत,महान स्वतंत्रता सेनानी स्मृतिशेष युगेश्वर ठाकुर उर्फ भूल्लर ठाकुर की प्रतिमा का अनावरण सह भुल्लर ठाकुर स्मृति वर्ग भवन का उद्घाटन स्थानीय विधायक श्री सिद्धार्थ पटेल,जानेमाने गांधीवादी चिंतक श्री लक्षणदेव प्रसाद सिंह एवं अवकाश प्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल श्री विजय कुमार मिश्र द्वारा संयुक्त रूप से किया गया!

    1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने के कारण उन्हें अनेक यातनाएं सहनी पड़ी,उनके घर को जला दिया गया,घोड़े के पीछे बांध कर घसीटा गया,फिर भी मातृभूमि को आजाद कराने हेतु संघर्ष करते रहे!स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान हेतु उन्हें भारत सरकार द्वारा ताम्र पत्र से सम्मानित किया गया!

     

    कार्यक्रम में प्रमुख सर्वोदयी चिंतक व जेपी सेनानी श्री लक्षणदेव प्रसाद सिंह ने भुल्लर बाबू को याद करते हुए एक ऐतिहासिक संस्मरण लोगो से साझा किया।

    उन्होंने कहा कि देश भारत छोड़ो आंदोलन में था।अंग्रेजों का दमन इतना बढ़ गया था कि कांग्रेस पार्टी में प्रखंड और जिला स्तर पर कोई नई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता था।ऐसे माहौल में तत्कालीन मुजफ्फरपुर (अब वैशाली) के लालगंज प्रखंड के लिए कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव होना था।दीप बाबू उर्फ दीपनारायण सिंह जो श्रीकृष्ण सिंह के बाद कुछ समय के लिए बिहार के मुख्यमंत्री भी बने) कांग्रेस के बड़े नेता थे और लालगंज के स्थानीय थे।इसलिए पार्टी की ओर से लालगंज के लिए अध्यक्ष चुनने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी।

    दीप बाबू ने इसके लिए लालगंज के कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई,सैकड़ों लोग जुटे।दीप बाबू ने पूछा कि जो लोग प्रखंड अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने को इच्छुक हैं,वे हाथ उठावें। मीटिंग से कोई हाथ नहीं उठा। दीप बाबू सन्न रह गए।फिर लंबी तकरीर दी।लोगों का भय दूर करना चाहा।आखिर में अपना वास्ता दिया।तब भी कोई तैयार नहीं हुआ।

    जानकार बताते हैं कि दीप बाबू इससे इतने आहत हुए कि रोते हुए वहां से निकलने लगे।तभी एक आवाज आई-‘ हो दीप बाबू लौटू,हम तैयार हती।’

    यह आवाज थी मानपुरा गांव के स्वतंत्रता सेनानी भुल्लर ठाकुर की।

    भुल्लर ठाकुर सिर्फ साक्षर थे, इसलिए उन्होंने लिखा-पढ़ी के लिए एक सहायक की मांग की, जो दीप बाबू ने पूरी करने की जिम्मेदारी उठाई।फिर क्या था उस वक्त कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में भुल्लर बाबू का चुनाव हो गया।

     

    जब यह खबर अंग्रेजों तक पहुंची तो लालगंज और हाजीपुर के अंग्रेज अधिकारी आग बबूला हो गए।भुल्लर ठाकुर को धमकी दी गई कि इंकार करो अन्यथा खैर नहीं।लेकिन भुल्लर ठाकुर ने कहलवा दिया कि एक बार जब गछ (स्वीकार) लिया तो मुकरने का सवाल नहीं है।बौखलाए अंग्रेज अधिकारियों ने चौबीस घंटे का अल्टिमेटम दे दिया। परंतु भुल्लर ठाकुर टस से मस नहीं हुए।

    उसके बाद जो हुआ वह इतिहास है।

    अंग्रेज अधिकारियों ने भुल्लर ठाकुर का घर घेर लिया।एक भी सामान निकालने तक नहीं दिया और घर में आग लगा दी।घर जल कर राख हो गया।जब भुल्लर ठाकुर इसके बाद भी नहीं माने तो उन्हें रस्से से बांध कर घोड़े से घसीटा गया और तो और उनके ससुराल के रास्ते घसीटते हुआ लालगंज थाना परिसर में लाया गया और वहां से ही भुल्लर बाबू की जेल यात्रा शुरू हुई।वे तब भी नहीं माने और ‘अंग्रेजो! भारत छोड़ो’ का नारा लगाते रहे।

     

    समारोह को संबोधित करते हुए वैशाली के विधायक सिद्धार्थ पटेल ने स्वाधीनता आंदोलन में शामिल परिवारों के बलिदान को रेखांकित करते हुए कहा कि भुल्लर ठाकुर और गुलजार पटेल ने अपने संघर्ष और त्याग से स्वाधीनता आंदोलन में वैशाली की भूमिका समृद्ध की।अंग्रेजों ने हर तरीके से आंदोलनकारियों को प्रताड़ित किया,लेकिन वे किसी को भी तोड़ नहीं सके।

    महात्मा गांधी ने मेरी नजर में,सबसे बड़ा काम यह किया था कि भयाक्रांत भारतीय आम जन के भीतर से भय को निकाल फेंका था।और जब यह भय समाप्त हो गया तो फिर गांव-गांव से अनेक साधारण लोग गांधी के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ उठ खड़े हुए। फिर इन्हीं साधारण लोगों ने ऐसा साहस प्राप्त कर लिया कि अंग्रेज ही भय में जीने लगे।तत्कालीन मुजफ्फरपुर और वर्तमान वैशाली के मानपुरा गांव निवासी किसान भुल्लर ठाकुर भी ऐसे ही लोगों में शामिल थे।जब सब भयभीत थे,तब उन्होंने लालगंज प्रखंड कांग्रेस की अध्यक्षता संभाली।इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकाई।इस महापुरुष के नाम को वर्तमान पीढ़ी याद करें यह हम सब का महत्वपूर्ण कार्य हैं।विधायक ने मध्य विद्यालय में इस महान सपूत की स्मृति में एक पुस्तकालय का निर्माण कराने,प्रखंड के एक सड़क को उनके नाम पर रखने,प्रखंड स्तर पर सभी सैनानियों का शिलालेख लगाने तथा प्रखंड के बीडीओ ऑफिस में स्वतंत्रता सेनानी का लिस्ट लगाने की घोषणा भी की। प्रपौत्र अमित कुमार ने कहा कि अपने पूर्वजों को याद करना हमारी जिम्मेदारी हैं,हम उनके द्वारा अर्जन किए गए संसाधन को उपयोग करते हैं लेकिन संसाधन को जिन्होंने अर्जन कर हमलोगों के लिए छोड़ गए उनको कैसे भूल सकते हैं।यह हमारा दायित्व हैं कि पूर्वज का सम्मान करें।

     

    इस मौके पर अवकाशप्राप्त लेफ्टिनेंट जनरल विजय कुमार मिश्र, आरडीएस कालेज, मुजफ्फरपुर के राजनीति शास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ अरुण कुमार सिंह,वयोवृद्ध प्राध्यापक प्रो के के सिन्हा एवं मुजफ्फरपुर गांधी शांति प्रतिष्ठान के सचिव अरविंद वरुण,भुल्लर ठाकुर के पौत्र अरुण ठाकुर,अजीत कुमार,सतीश कुमार,राजेश कुमार,नवीन कुमार,प्रपौत्र अंकित कुमार,मुखिया मुकेश साह,सत्यनारायण पटेल,सरपंच वीरेंद्र कुंवर,पूर्व मुखिया रवि किशन,पूर्व मुखिया मुन्ना ठाकुर,के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

    स्वतंत्रता सेनानी स्मृतिशेष भुल्लर ठाकुर की प्रतिमा का अनावरण
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