केरेडारी से टंडवा खधैया पुल तक निजी कोल दुलाई सड़क निर्माण पर जिला परिषद ने की कार्रवाई की मांग
छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 की धारा 49 के आड़ में फर्जीवाड़ा का गंभीर आरोप
JARL पर भू राजस्व विभाग द्वारा कार्रवाई आदेश के बाद जनप्रतिनिधि ने भी की कार्रवाई की मांग तेज
शैलेश सिंह
चतरा: केरेडारी के गोपदा TLS से टंडवा खधैया पुल तक निजी कोल दुलाई सड़क निर्माण को लेकर फर्जीवाड़ा ,भूमि, पर्यावरण और जनसुरक्षा से जुड़े मामले में टंडवा उतरी जिला परिषद देवंती देवी ने चतरा उपायुक्त को आवेदन देकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर कार्रवाई की मांग की है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि JARL (जय अंबे रोड लाइन्स) द्वारा गोपदा क्षेत्र से टंडवा खधैया पुल तक निजी कोल दुलाई सड़क निर्माण में गैरमजरूआ सरकारी भूमि समेत अन्य श्रेणी की भूमि पर निर्माण एवं खुदाई का कार्य किया गया है। जिसमें सरकारी भूमि, सड़क भूमि, वन भूमि, नदी क्षेत्र और रैयती भूमि के उपयोग की वैधता की जांच कराने की मांग की है। आवेदन में टंडवा अंचल कार्यालय के पूर्व पत्र का हवाला देते हुए कहा गया है कि मौजा वृन्दा के खाता संख्या 29 के प्लॉट संख्या 329 और 333, क्रमशः 1.18 एकड़ और 3.28 एकड़ भूमि सर्वे खतियान में गैरमजरूआ खास किस्म परती कदीम दर्ज है। आवेदनकर्ता ने इन जमीनों की वर्तमान स्थिति, स्वामित्व, सीमांकन तथा वहां किए गए निर्माण या खुदाई की वैधता की राजस्व एवं तकनीकी स्तर पर जांच कराने की मांग की है। वहीं, टंडवा अंचल के ज्ञापांक 771, दिनांक 18 अगस्त 2026 का हवाला देते हुए आवेदन में भारी वाहनों के बढ़ते दबाव, सड़क दुर्घटनाओं और प्रदूषण की आशंका का भी उल्लेख किया गया है। रैयती भूमि के संबंध में आवेदन में अपर समाहर्ता, चतरा के 31 अगस्त 2026 के पत्र का उल्लेख करते हुए छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 की धारा 49 के तहत रैयती भूमि को छह वर्षों के लिए रेंट पर लेने की प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है। आरोप है कि कुछ रैयतों को कथित रूप से पूरी जानकारी दिए बिना या गुमराह कर उनकी भूमि का सड़क निर्माण में उपयोग किया जा रहा है। देवंती देवी ने संबंधित रैयती भूमि के दस्तावेज, रैयतों की सहमति, किराया या लीज संबंधी प्रक्रिया तथा निर्माण की वैधानिक अनुमति की जांच कराने की मांग की है। साथ ही सरकारी भूमि हस्तांतरण नीति, 2023 समेत संबंधित नियमों के अनुपालन की भी जांच की मांग की गई है।
आवेदन में कहा गया है कि यदि जांच में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा, बिना अनुमति निर्माण अथवा अन्य अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित व्यक्ति या कम्पनी के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी एवं राजस्व कार्रवाई की जाए। साथ ही सरकारी एवं सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है।

