बजट 2026: रिफॉर्म एक्सप्रेस की रफ्तार, सवालों के बीच उम्मीदों का सफर
देवानंद सिंह
केंद्र सरकार द्वारा पेश किया गया यह बजट एक बार फिर देश को “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पर सवार बताते हुए भविष्य की ओर तेज़ रफ्तार का दावा करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे नई ऊर्जा और नई गति देने वाला बजट बताया है, वहीं विपक्ष ने युवाओं की बेरोज़गारी और किसानों की बदहाली को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। इन परस्पर विरोधी दावों के बीच यह बजट उम्मीदों, संभावनाओं और सवालों तीनों को एक साथ लेकर सामने आया है।
इस बजट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को केंद्र में रखते हुए मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा, छोटे व मझोले उद्योग (MSME), शिक्षा और तकनीक पर विशेष ज़ोर दिया है। सरकार का साफ संदेश है कि देश की प्रगति का इंजन अब घरेलू उत्पादन, नवाचार और युवा शक्ति होगा।
सरकार ने इस बजट में युवा शक्ति पर भरोसा जताते हुए कौशल विकास, AI, स्टार्टअप और क्रिएटिव इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की बात की है। शिक्षा क्षेत्र में 7 बड़े ऐलान कर यह संकेत दिया गया है कि आने वाला दौर तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इनोवेशन का होगा। विदेश में पढ़ाई को सस्ता बनाने और डिजिटल शिक्षा को मजबूत करने के प्रस्ताव निश्चित रूप से मध्यम वर्ग और छात्रों के लिए राहत भरे हैं।
हालांकि विपक्ष का आरोप है कि ये घोषणाएं ज़मीन पर रोजगार में कब और कितना बदलेंगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। विपक्ष का कहना है कि “युवाओं को नौकरी नहीं, सिर्फ भाषण मिल रहे हैं।” यह सवाल वाजिब है कि जब तक बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन नहीं होता, तब तक विकास के दावे अधूरे ही रहेंगे।
किसानों के लिए बजट में कुछ योजनाओं की निरंतरता और कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश का भरोसा दिया गया है, लेकिन किसान संगठनों और विपक्ष का मानना है कि आय बढ़ाने और लागत घटाने के ठोस उपाय अभी भी नाकाफी हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और फसलों की कीमतों को लेकर कोई बड़ा ऐलान न होना निराशाजनक माना जा रहा है।
आम आदमी के लिहाज से देखें तो बजट के बाद कुछ वस्तुएं सस्ती और कुछ महंगी हुई हैं। इससे यह साफ है कि सरकार ने राजकोषीय संतुलन बनाए रखते हुए सीमित राहत देने का रास्ता चुना है। इनकम टैक्स स्लैब में किसी बड़े बदलाव का न होना मध्यम वर्ग के लिए मिला-जुला अनुभव है—न नई राहत, न नया बोझ।
MSME सेक्टर को दी गई सौगात इस बजट की मजबूत कड़ी है। सस्ते ऋण, तकनीकी अपग्रेडेशन और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की योजनाएं आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती देती हैं। यदि ये योजनाएं सही ढंग से लागू होती हैं, तो रोजगार सृजन का बड़ा आधार बन सकती हैं।
इस बजट में रक्षा क्षेत्र को अब तक का सबसे बड़ा आवंटन मिला है। इसका उद्देश्य सिर्फ सुरक्षा मजबूत करना नहीं, बल्कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना भी है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्वदेशी रक्षा उपकरणों के निर्माण पर ज़ोर भविष्य में भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में मजबूत खिलाड़ी बना सकता है।
सरकार का फोकस दीर्घकालिक विकास, मैन्युफैक्चरिंग और निवेश पर है, जबकि विपक्ष तात्कालिक राहत—रोजगार, किसान आय और महंगाई—को मुद्दा बना रहा है। सच यह है कि बजट में दिशा तो स्पष्ट है, लेकिन रफ्तार और ज़मीन पर असर ही इसकी असली कसौटी होगी।
कुल मिलाकर, यह बजट एक विजन डॉक्यूमेंट के रूप में सामने आता है—जो भविष्य की तैयारी करता है, आत्मनिर्भरता की नींव मजबूत करता है और युवा शक्ति पर भरोसा जताता है। लेकिन साथ ही यह सवाल भी छोड़ जाता है कि क्या आम आदमी, किसान और बेरोज़गार युवा को इसका तात्कालिक लाभ महसूस होगा?
रिफॉर्म एक्सप्रेस की पटरी बिछ चुकी है, इंजन तेज है अब ज़रूरत है कि यह सफर सिर्फ घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि हर वर्ग की ज़िंदगी में ठोस बदलाव लेकर पहुंचे। यही इस बजट की असली परीक्षा होगी।

