25 साल दिशोम गुरु शिबू सोरेन के सांसद प्रतिनिधि रहे आशीश तिवारी ने कहा गुरु जी का जाना पूरे देश के लिए एक युग का अंत है
राष्ट्र संवाद सं
जामताड़ा : झारखंड आंदोलन के वरिष्ठ नेता और 1982 से दिशोम गुरु शिबू सोरेन के संघर्षशील साथी रहे आशीष तिवारी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। तिवारी ने कहा कि शिबू सोरेन का जाना न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए एक युग का अंत है। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु सिर्फ एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे आदिवासी समाज की आत्मा, संघर्ष का प्रतीक और न्याय के लिए लड़ने वाली एक जीवंत प्रेरणा थे।
आशीष तिवारी ने बताया कि उन्हें लगभग 25 वर्षों तक गुरुजी के साथ सांसद प्रतिनिधि के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने न केवल राजनीति की बारीकियां सीखी, बल्कि सामाजिक सरोकारों को समझने और जनसेवा के प्रति समर्पण की भावना भी गुरुजी से पाई। उन्होंने कहा कि गुरुजी का सरल स्वभाव, स्पष्ट विचार और संघर्षशील नेतृत्व हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।
तिवारी ने याद करते हुए बताया कि गुरुजी के नेतृत्व में आदिवासी समाज ने अपनी पहचान और अधिकारों की लड़ाई लड़ी, और उसी का परिणाम था कि झारखंड राज्य का निर्माण संभव हो सका। उन्होंने कहा कि गुरुजी के विचार, आदर्श और संघर्ष की विरासत को संजो कर रखना आज की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए कहा कि दिशोम गुरु का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बना रहेगा। साथ ही उन्होंने गुरुजी के परिजनों और समर्थकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
तिवारी ने कहा कि गुरुजी के साथ बिताए गए पल हमेशा स्मरणीय रहेंगे और उनकी सीख समाजसेवा के पथ पर उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेगी।

