राष्ट्र संवाद संवाददाता
सार्वजनिक क्षेत्र की सामरिक कंपनी यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) एक बार फिर वित्तीय घोटाले को लेकर विवादों में घिर गई है। कंपनी के पूर्व क्लर्क गोपीनाथ दास पर ₹56.60 लाख की अनियमितता का आरोप है, जिसकी जांच सीबीआई द्वारा की गई थी। मामला अब रांची स्थित विशेष अदालत में विचाराधीन है, जहां गवाहों की पेशी शुरू हो चुकी है।
सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, आरोपी ने वर्ष 2014 से 2019 के बीच फर्जी यात्रा भत्ता (₹29.14 लाख) और ओवरटाइम भुगतान (₹27.46 लाख) के जरिए कंपनी को नुकसान पहुंचाया। बिल उन कर्मचारियों के नाम पर लगाए गए जो उस अवधि में ड्यूटी पर नहीं थे।
यह मामला वर्ष 2019 में दर्ज हुआ और गोपीनाथ दास को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया था। 2021 में उन्हें जमानत मिली। अब जांच इस ओर केंद्रित है कि यह चूक प्रशासनिक लापरवाही थी या सुनियोजित धोखाधड़ी।
मामले का एक नया पहलू यह है कि आरोपी गोपीनाथ दास के बड़े भाई सुरोजित दास यूसीआईएल के चेयरमैन सह प्रबंध निदेशक के पर्सनल असिस्टेंट के पद पर पिछले 15 वर्षों से कार्यरत हैं, जबकि कंपनी में आमतौर पर अधिकारियों का 2-3 वर्ष में स्थानांतरण होता है। इससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
सीबीआई व यूसीआईएल प्रबंधन की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सामाजिक संगठनों और यूनियनों ने मामले की स्वतंत्र जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि ऐसे संस्थान में भाई-भतीजावाद और लंबी तैनाती संस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।
पृष्ठ रचनाकार: सिराज अंसारी जामताड़ा

