राष्ट्र संवाद संवाददाता
चांडिल, सरायकेला-खरसावां: जिले में अवैध बालू खनन और परिवहन पर अंकुश लगाने की तमाम कोशिशों के बावजूद बालू माफिया का दबदबा लगातार बना हुआ है। जिला खनन विभाग द्वारा की गई कार्रवाई के बावजूद पुलिस और अंचल प्रशासन के सहयोग की कमी के कारण यह अभियान अधूरा साबित हो रहा है।
खनन विभाग की सराहनीय पहल
1 अप्रैल 2024 से 24 जून 2025 तक खनन विभाग ने कुल 34 मामलों में कार्रवाई करते हुए 53,700 घनफुट अवैध बालू जब्त की और 40.10 लाख रुपये का जुर्माना वसूला। साथ ही साथ अवैध बालू कारोबारियों पर प्राथमिकी भी दर्ज की गई, जो विभाग की एक बड़ी उपलब्धि है।
जिला खनन पदाधिकारी जे. एस. सत्पथी की अगुवाई में विभाग ने पहली बार बड़ी पहल करते हुए चिन्हित मार्गों—खासकर ईचागढ़ थाना गेट सहित—पर सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं ताकि अवैध परिवहन पर नजर रखी जा सके। साथ ही 18003456490 टोल फ्री नंबर भी जारी किया गया है, जिससे आम लोग भी सूचना देकर इस मुहिम में भागीदार बन सकें।
पुलिस और अंचल प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल
हालांकि खनन विभाग की इस सक्रियता को स्थानीय पुलिस और अंचल प्रशासन का अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। 25 जून को हुई जिला स्तरीय माइनिंग टास्क फोर्स की बैठक में पुलिस अधीक्षक मुकेश लुनायत और उपायुक्त द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि अवैध बालू खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, परंतु ईचागढ़, कुकड़ू समेत कई संवेदनशील इलाकों में अंचलाधिकारी और थाना प्रभारियों की निष्क्रियता से माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
डर के साए में जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री ओर ग्रामीण
खनन विभाग ने भले ही आम जनता के लिए शिकायत की व्यवस्था की हो, लेकिन पुलिस संरक्षण में फल-फूल रहे बालू माफिया और उनके साथ जुड़े सफेदपोश नेताओं, अपराधियों और दबंगों के डर से ग्रामीणों ने चुप्पी साध ली है। सूत्रों के अनुसार स्थानीय ईचागढ़,डुमरा, चौड़ा, जमशेदपुर, आदित्यपुर, गम्हरिया, कांड्रा, आजादनगर और मानगो जैसे इलाकों के कई प्रभावशाली लोग इस सिंडिकेट में सक्रिय हैं।
बड़ा सवाल: क्या प्रशासन के आदेशों को ताक पर रख दिया गया है?
अब बड़ा सवाल यह है कि जब जिले के डीसी और एसपी खुद अवैध बालू कारोबार पर कार्रवाई के निर्देश दे रहे हैं, तब स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक पदाधिकारी क्यों निष्क्रिय हैं? क्या अवैध बालू कारोबार से जुड़े प्रभावशाली लोगों के दबाव में आकर पूरा सिस्टम पंगु हो चुका है?
जिला खनन पदाधिकारी की ईमानदारी दूसरी ओर अवैध कारोबारियों के संरक्षक …
एक ओर जिला खनन पदाधिकारी जे. एस. सत्पथी जैसे अधिकारी ईमानदारी से काम कर राजस्व में बढ़ोतरी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस और स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता पूरे अभियान पर सवाल खड़े कर रही है। जब तक प्रशासनिक तालमेल नहीं बनता और राजनीतिक संरक्षण खत्म नहीं होता, तब तक अवैध बालू कारोबारियों पर नकेल कसना मुश्किल रहेगा ?
पृष्ठ रचनाकार: सिराज अंसारी जामताड़ा

