Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » मोबाइल की लत दे रही कलर ब्लाइंडनेस का रोग
    Breaking News झारखंड

    मोबाइल की लत दे रही कलर ब्लाइंडनेस का रोग

    Nizam KhanBy Nizam KhanJuly 9, 2025No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    राष्ट्र संवाद मथुरा ब्यूरो

    मथुरा (श्याम बिहारी भार्गव)। मोबाइल, लैपटॉप का स्क्रीनिंग टाइम आंखों की कोशिकाओं पर बुरा असर डाल रहा है। इसका असर बच्चों की रंगों को पहचानने की क्षमता पर पड़ रहा है। वे कलर ब्लाइंडनेस जैसी समस्या की चपेट में आ रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि सामान्य आंख का आकार 20 से 23 मिलीमीटर और पुतली का आकार 10 से 12 मिलीमीटर होता है। परंतु अब कई बच्चों में आंखों का आकार 18 से 19 मिलीमीटर और पुतली का आकार 8 से 9 मिलीमीटर तक देखा जा रहा है। यह बदलाव आंखों की सेहत के लिए गंभीर चेतावनी है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 70 से 80 मरीज आ रहे हैं। इनमें से लगभग 60 प्रतिशत मरीज 12 से 25 वर्ष आयु वर्ग के हैं। डिजिटल युग में मोबाइल और लैपटॉप बच्चों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गए हैं, लेकिन यह आधुनिकता अब उनकी आंखों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। नेत्र रोग विशेषज्ञ का कहना है कि बच्चों में मोबाइल की लत आंखों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा रही है। लगातार स्क्रीन देखने के कारण रेटिना प्रभावित हो रहा है और आंखों तथा पुतलियों के आकार में असामान्य परिवर्तन देखा जा रहा है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरेंद्र राठौर बताते हैं कि कोरोना संक्रमण के बाद से बच्चों और युवाओं में मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) और हाइपरमेट्रोपिया (दूर दृष्टि दोष) के मामले तेजी से बढ़े हैं। ये रोग पहले आमतौर पर 35 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में देखे जाते थे, लेकिन अब ये समस्या कम उम्र के बच्चों में भी देखने को मिल रही है।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleमुंडिया पूर्णिमा गोवर्धन मेला में स्पेशल ट्रेनो का सुरक्षित परिचालन परिचालन टीम,वाणिज्यक टीम और आरपीएफ द्वारा मेला कंट्रोल रूम से हर पल स्थिति का लिया जा रहा जायजा
    Next Article मज़दूर योजनाओं का लाभ उठाएं: गीता सोनी

    Related Posts

    23 मई को सभी मतदान केंद्रों पर प्रकाशित होगी Un-Mapped Elector सूची, मतदाता कर सकेंगे नाम की जांच

    May 21, 2026

    डी.बी.एम.एस. बालिका विद्यालय में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

    May 21, 2026

    सांसद बिद्युत बरण महतो ने जनता दरबार में सुनी समस्याएं, अधिकारियों को दिए त्वरित समाधान के निर्देश

    May 21, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    23 मई को सभी मतदान केंद्रों पर प्रकाशित होगी Un-Mapped Elector सूची, मतदाता कर सकेंगे नाम की जांच

    डी.बी.एम.एस. बालिका विद्यालय में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

    डी.बी.एम.एस. बालिका विद्यालय में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

    सांसद बिद्युत बरण महतो ने जनता दरबार में सुनी समस्याएं, अधिकारियों को दिए त्वरित समाधान के निर्देश

    जिला स्तरीय आधार निगरानी समिति की बैठक में बच्चों के आधार पंजीकरण पर जोर

    जिला ई-गवर्नेंस सोसायटी की बैठक में डिजिटल सेवाओं को सुदृढ़ करने पर जोर

    तकनीकी विभागों की समीक्षा बैठक में योजनाओं को समयबद्ध पूरा करने का निर्देश

    नाला विधानसभा क्षेत्र की बेटी देवासी हेंब्रम को विधानसभाध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने किया सम्मानित

    जमशेदपुर। नदी और पर्वत पर राष्ट्रीय सम्मेलन की तैयारियां पूरी हो गई हैं।

    झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता, 27 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.