राष्ट्र संवाद की रिपोर्ट के बाद हरकत में आया प्रशासन, वर्षों से परेशान ग्रामीणों को मिली राहत की उम्मीद
राष्ट्र संवाद संवाददाता सिराज अंसारी जामताड़ा
जामताड़ा: एक बार फिर साबित हुआ कि जब मीडिया जनता की आवाज बनता है, तो व्यवस्था झकझोर कर उठ खड़ी होती है। सुपायडीह पंचायत अंतर्गत फागुडीह और नामूपाड़ा गांव के बीच बहने वाली जोरिया नाला पर पुल नहीं होने की वजह से वर्षों से ग्रामीण, खासकर स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर आना-जाना करना पड़ता था। बारिश के मौसम में स्थिति और भी विकराल हो जाती थी — नाले का जलस्तर बढ़ जाता, रास्ता कट जाता और स्कूल जाने वाले बच्चे घंटों रास्ते में फंसे रहते। लेकिन राष्ट्र संवाद की विशेष रिपोर्ट में जब बच्चों को उनके अभिभावकों द्वारा कंधे पर उठा कर नाला पार कराते हुए मार्मिक तस्वीरें और वीडियो सामने आए, तो पूरे जिले के प्रशासनिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया।

प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया, टीम मौके पर पहुंची
रिपोर्ट प्रकाशित होने के कुछ ही घंटों में ग्रामीण विकास विशेष प्रमंडल की इंजीनियरिंग टीम मौके पर पहुंची और स्थल का गहन निरीक्षण किया। इस टीम का नेतृत्व सहायक अभियंता रिजु उरांव कर रहे थे, जिनके साथ कनीय अभियंता शुभम राज भी उपस्थित रहे।

निरीक्षण के बाद सहायक अभियंता रिजु उरांव ने राष्ट्र संवाद से कहा— “हमें विभागीय स्तर पर निर्देश प्राप्त हुआ था कि इस क्षेत्र की स्थिति काफी गंभीर है। आज हमने स्थल निरीक्षण किया और पाया कि यहाँ बड़ा ब्रिज बनाना व्यवहारिक नहीं होगा। हम यहाँ दो बॉक्स कन्वर्ट का निर्माण करेंगे, जिससे बारिश में भी लोगों का आवागमन सुरक्षित बना रहे।”
स्थानीय ग्रामीणों की पीड़ा वर्षों पुरानी है। लगातार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई थी। राष्ट्र संवाद
की रिपोर्ट ने न केवल प्रशासन को सक्रिय किया, बल्कि ग्रामीणों के भीतर एक नई उम्मीद भी जगा दी।
ग्रामीणों ने जताया मीडिया के प्रति आभार
स्थानीय ग्रामीणों ने मीडिया का आभार जताते हुए कहा— “हमें बहुत दुख होता था जब बच्चों को जान जोखिम में डालकर स्कूल भेजना पड़ता था। आज जब हमारी समस्या अखबार में प्रमुखता से छपी, तब जाकर प्रशासन की आंखें खुलीं। अब पहली बार लग रहा है कि हमारे बच्चे सुरक्षित स्कूल जा सकेंगे।”
यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि मीडिया न केवल लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, बल्कि जनभावनाओं का असली प्रतिनिधि भी है। राष्ट्र संवाद ने इस मुद्दे को उजागर कर प्रशासन को जवाबदेह बनाया और जनता की वास्तविक समस्याओं को शासन तक पहुँचाया। अब जब प्रशासनिक अमला खुद मौके पर पहुंच चुका है और निर्माण कार्य की दिशा तय हो चुकी है, तो ग्रामीणों को वर्षों बाद राहत की एक किरण नजर आई है।
