‘एस्टीन से कभी नहीं मिला, Island से कोई लेना-देना नहीं’ — राहुल के आरोपों पर हरदीप सिंह पुरी का जवाब; बीजेपी ने नेहरू-इंदिरा का मुद्दा भी उठाया
एजेंसी
नई दिल्ली, 11 फरवरी।
अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर राहुल गांधी के ‘होलसेल सरेंडर’ वाले बयान से शुरू हुआ सियासी विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। इस बीच राहुल गांधी द्वारा लगाए गए कथित आरोपों पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका “एस्टीन से कभी कोई व्यक्तिगत संपर्क नहीं रहा और किसी भी ‘Island’ से उनका कोई लेना-देना नहीं है।”
हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मैंने न तो कभी एस्टीन से मुलाकात की और न ही किसी आइलैंड से मेरा कोई संबंध है। यह पूरी तरह निराधार और राजनीति से प्रेरित आरोप हैं।” उन्होंने कहा कि तथ्यों के बिना लगाए जा रहे आरोप केवल जनमानस को भ्रमित करने की कोशिश हैं।
उधर, बीजेपी ने इस पूरे विवाद को कांग्रेस के ऐतिहासिक रिकॉर्ड से जोड़ते हुए पलटवार किया। पार्टी नेताओं ने पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि कांग्रेस को राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल उठाने से पहले अपने इतिहास को देखना चाहिए।
बीजेपी प्रवक्ताओं ने पॉल एम. मैकगैरी की पुस्तक ‘Spying in South Asia’ और पूर्व अमेरिकी राजदूत डैनियल पैट्रिक मोयनिहान के संस्मरणों का हवाला देते हुए कहा कि इन दस्तावेजों में उस दौर की नीतियों और खुफिया तंत्र से जुड़े कई विवादित पहलुओं का उल्लेख मिलता है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “नेहरू सरकार ने खुफिया तंत्र को मजबूत करने में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई और इंदिरा गांधी के दौर में भी विदेशी एजेंसियों को लेकर सवाल उठे थे।”
बीजेपी ने राहुल गांधी के ‘होलसेल सरेंडर’ वाले बयान को “राजनीतिक अतिशयोक्ति” बताते हुए कहा कि वर्तमान सरकार किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगी। पार्टी का कहना है कि भारत आज वैश्विक मंच पर पहले से अधिक मजबूत स्थिति में है।
वहीं कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि बीजेपी अतीत के मुद्दे उठाकर वर्तमान आर्थिक और विदेश नीति के सवालों से ध्यान भटका रही है। कांग्रेस नेताओं ने दोहराया कि ट्रेड डील पर सरकार को पारदर्शिता बरतनी चाहिए।
ट्रेड डील, ऐतिहासिक आरोप-प्रत्यारोप और व्यक्तिगत जवाबी हमलों के बीच सियासी माहौल गरमाया हुआ है। आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर इस मुद्दे पर और तीखी बहस होने की संभावना है।

