नक्सलियों के सरेंडर के बाद कुचाई के जंगल में बड़ा ऑपरेशन, हथियारों का जखीरा बरामद
राष्ट्र संवाद संवाददाता
सरायकेला: पश्चिम बंगाल में तीन बड़े इनामी माओवादियों के आत्मसमर्पण के ठीक बाद सरायकेला-खरसावां के नक्सल प्रभावित कुचाई इलाके से बड़ी खबर सामने आ रही है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक सरायकेला- खरसावां पुलिस ने कोबरा और पश्चिम बंगाल पुलिस के सहयोग से कुचाई थाना क्षेत्र के रोलाहातु के जंगलों में संयुक्त सर्च ऑपरेशन चलाया है. अभियान के दौरान जंगल से भारी मात्रा में हथियार और अन्य नक्सली सामग्री बरामद होने की सूचना है. फिलहाल अभियान जारी रहने के कारण पुलिस की ओर से बरामदगी का पूरा ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है.
इस ऑपरेशन की कड़ी गुरुवार को पश्चिम बंगाल में हुए तीन माओवादियों के आत्मसमर्पण से जुड़ती दिखाई दे रही है. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक रीजनल कमेटी सदस्य रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन, उसकी पत्नी और जोनल कमेटी सदस्य मीता उर्फ नयनतारा तथा सब-जोनल कमेटी सदस्य गौरी उर्फ बुल्लू ने पश्चिम बंगाल पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है. सचिन पर झारखंड सरकार का 15 लाख और मीता पर 10 लाख रुपये का इनाम था. तीनों लंबे समय से झारखंड- पश्चिम बंगाल सीमा क्षेत्र में रहे हैं. सचिन का नाम पूर्व सांसद सुनील महतो हत्याकांड से भी जुड़ा रहा है. उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार वह इस हत्याकांड के बाद करीब दो दशक से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था.
पुलिस रिकॉर्ड पर आधारित रिपोर्टों में सचिन के खिलाफ 44, मीता के खिलाफ 19 और गौरी के खिलाफ 18 मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है. इनमें मुठभेड़, आईईडी विस्फोट और सुरक्षा बलों पर हमलों से जुड़े मामले भी शामिल हैं.
सूत्रों के मुताबिक इन्हीं माओवादियों से पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर कुचाई के रोलाहातु जंगल में ऑपरेशन शुरू किया गया. मिले इनपुट के मुताबिक ऑपरेशन में सरायकेला- खरसावां पुलिस के साथ कोबरा और पश्चिम बंगाल पुलिस भी शामिल है. जंगल से हथियारों और अन्य सामग्री की बरामदगी की सूचना है, लेकिन कितने और किस प्रकार के हथियार मिले हैं, इसकी आधिकारिक सूची अभी सामने नहीं आई है. सुरक्षा बल जंगल में आगे भी तलाशी अभियान चला रहे हैं. ऐसे में ऑपरेशन पूरा होने के बाद बरामद हथियारों, गोला- बारूद और संभावित नक्सली डंप को लेकर बड़ा खुलासा हो सकता है.
तीन वरिष्ठ माओवादियों के सरेंडर के महज एक दिन बाद कुचाई के जंगल में शुरू हुआ यह ऑपरेशन महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यदि पुलिस आधिकारिक रूप से यह पुष्टि करती है कि बरामदगी आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से मिली सूचना पर हुई है, तो इससे झारखंड- बंगाल सीमा क्षेत्र में माओवादी नेटवर्क के ठिकानों और हथियारों के डंप को लेकर सुरक्षा बलों को महत्वपूर्ण सुराग मिलने के संकेत होंगे.

