Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » धूमकुड़िया भवन पर लटका ताला: 5 गांवों ने चिपकाया नोटिस, जांच तक बुकिंग बंद
    Breaking News Headlines अपराध खबरें राज्य से जमशेदपुर झारखंड

    धूमकुड़िया भवन पर लटका ताला: 5 गांवों ने चिपकाया नोटिस, जांच तक बुकिंग बंद

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 1, 2026No Comments3 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    धूमकुड़िया भवन
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    लेखक: राष्ट्र संवाद

    धूमकुड़िया भवन पर ग्रामीणों का हल्ला बोल

    पूर्वी सिंहभूम जिले के आस्था केंद्र रंकीनी मंदिर का विवाद एक बार फिर तूल पकड़ रहा है। करीब 3 करोड़ की लागत से बने धूमकुड़िया भवन में कार्यक्रम और बुकिंग को लेकर 5 गांवों के ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है।

    ग्रामसभा के बैनर तले ग्रामीणों ने गुरुवार को भवन पर नोटिस चिपकाकर साफ चेतावनी दे दी कि जांच रिपोर्ट आने और प्रशासनिक फैसला होने तक यहां किसी भी तरह के आयोजन पर रोक लगाई जाए।

    क्या है पूरा मामला

    ग्रामसभा की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि धूमकुड़िया भवन को लेकर पहले से जांच चल रही है। रोहिणी बेड़ा समेत 5 गांवों के लोगों का तर्क है कि जांच पूरी होने से पहले बुकिंग और कार्यक्रमों की इजाजत देना गलत होगा।

    ग्रामीणों का कहना है, “रंकीनी मंदिर सिर्फ पूजा स्थल नहीं है। यह हमारे 5 गांवों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान है। ऐसे में भवन के इस्तेमाल में ग्रामसभा की सहमति जरूरी है।”

    सबसे बड़ा सवाल: बिना पूछे चाबी किसने दी?

    ग्रामसभा ने प्रशासन से सवाल किया है कि बिना ग्रामसभा की जानकारी के कमिटी बनाकर सरकारी भवन की चाबी किस आधार पर सौंपी गई। ग्रामीणों ने इसकी भी जांच कराने की मांग की है।

    धूमकुड़िया भवन की जर्जर हालत और ग्रामीणों के आरोप

    ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि धूमकुड़िया भवन अभी से जर्जर होने लगा है।

    • बिल्डिंग में कई जगह दरारें पड़ गई हैं
    • छत के ऊपर पाइपलाइन नहीं लगने से पूरी बिल्डिंग में पानी रिस रहा है
    • ठेकेदार ने काम अधूरा छोड़ दिया है

    ग्रामीणों ने मांग की है कि भवन की गुणवत्ता की भी जांच हो और दोषी ठेकेदार पर कार्रवाई की जाए। इस संबंध में ग्रामीण पहले भी उपयुक्त को कई बार पत्र दे चुके हैं।

    आंदोलन की चेतावनी

    ग्रामीणों ने साफ कहा है कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे फिर सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे।

    एक ग्रामीण ने कहा, “हम शांति चाहते हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कोई फैसला हो। तब तक धूमकुड़िया भवन की बुकिंग बंद रखी जाए। हम किसी का विरोध नहीं कर रहे।”

    नोटिस चिपकते ही मंदिर समिति और प्रशासन के बीच हलचल तेज हो गई है। फिलहाल ग्रामसभा के इस कदम के बाद 3 करोड़ का धूमकुड़िया भवन एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है।

    अब प्रशासन इस पर क्या रुख अपनाता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

    पेसा कानून और ग्रामसभा के अधिकार

    इस पूरे प्रकरण में पेसा कानून (PESA Act) के तहत ग्रामसभा को प्राप्त अधिकारों का हनन होने का आरोप लगाया जा रहा है। जानकारों के अनुसार, अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी सामुदायिक भवन या संपत्ति के प्रबंधन और उपयोग का अधिकार ग्रामसभा के पास निहित है। बिना ग्रामसभा की सहमति के किसी कमिटी को चाबी सौंपना पेसा कानून की भावना के विपरीत है। ग्रामीणों का यह कदम अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    प्रशासन की भूमिका और आगे की राह

    उपायुक्त कार्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कमिटी का गठन किया जा सकता है। भवन निर्माण में अनियमितता और गुणवत्ता की शिकायत पूर्व में भी मिली थीं, लेकिन कार्रवाई लंबित थी। अब ग्रामीणों के खुले विरोध के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। देखना होगा कि प्रशासन ग्रामसभा की मांगों को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषी ठेकेदार एवं अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है। अधिक जानकारी के लिए झारखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

    ग्रामसभा जादूगोड़ा झारखंड समाचार धूमकुड़िया भवन रंकीनी मंदिर
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleराष्ट्र निर्माण का समय: युवाओं की जिम्मेदारी और नेतृत्व का संदेश
    Next Article कानून अराजकता के भय से नहीं चल सकता: लोकतंत्र में विधि के शासन का महत्व

    Related Posts

    झारखंड के सतत विकास के लिए सभी चैम्बर एक मंच पर, नीति निर्माण में उद्योग जगत की भागीदारी पर जोर

    August 1, 2026

    चाईबासा में शिबू सोरेन की प्रतिमा को लेकर विवाद गहराया, कई कार्यकर्ता हिरासत में

    August 1, 2026

    चाईबासा में शिबू सोरेन की प्रतिमा को लेकर विवाद गहराया, कई सामाजिक कार्यकर्ता हिरासत में

    August 1, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    राष्ट्रीय बहन दिवस 2026: बहनें संस्कृति, संवेदना और सशक्त भारत की आधारशिला

    झारखंड के सतत विकास के लिए सभी चैम्बर एक मंच पर, नीति निर्माण में उद्योग जगत की भागीदारी पर जोर

    बहन का रिश्ता: राष्ट्रीय बहन दिवस 2026 पर ललित गर्ग का विशेष आलेख

    राष्ट्रीय बहन दिवस 2026: बहन संस्कृति, संवेदना और सशक्त भारत की आधारशिला – ललित गर्ग

    चाईबासा में शिबू सोरेन की प्रतिमा को लेकर विवाद गहराया, कई कार्यकर्ता हिरासत में

    चाईबासा में शिबू सोरेन की प्रतिमा को लेकर विवाद गहराया, कई सामाजिक कार्यकर्ता हिरासत में

    चाईबासा में शिबू सोरेन की प्रतिमा को लेकर विवाद, कई सामाजिक कार्यकर्ता हिरासत में

    कानून अराजकता के भय से नहीं चल सकता: लोकतंत्र में विधि के शासन का महत्व

    राष्ट्र निर्माण का समय: अजीत डोभाल और अमित शाह का युवाओं को संदेश

    राष्ट्र निर्माण का समय: युवाओं की जिम्मेदारी और नेतृत्व का संदेश

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.