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    Home » गाजे-बाजे के साथ निकली कलश विसर्जन शोभायात्रा, सात दिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेले का समापन
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    गाजे-बाजे के साथ निकली कलश विसर्जन शोभायात्रा, सात दिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेले का समापन

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 10, 2026No Comments4 Mins Read
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    कलश विसर्जन शोभायात्रा
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता राजेश कुमार

    बेगूसराय में भव्य कलश विसर्जन शोभायात्रा के साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेले का समापन

    बिहार के बेगूसराय जिले के खोदावंदपुर प्रखंड क्षेत्र में धार्मिक आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। तारा बरियारपुर स्थित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी बाल पूजा समिति के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेले का गुरुवार को भव्य कलश विसर्जन शोभायात्रा के साथ समापन हो गया। इस धार्मिक आयोजन ने पूरे क्षेत्र के वातावरण को भक्तिमय बना दिया था। सात दिनों तक चले इस मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा इलाका भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में डूबा रहा।

    गाजे-बाजे के साथ निकली कलश विसर्जन शोभायात्रा का विहंगम दृश्य

    इस अवसर पर गाजे-बाजे और धार्मिक जयघोष के बीच निकाली गयी कलश विसर्जन शोभायात्रा में 101 कलशधारियों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। 10 सितंबर की संध्या पूजा स्थल से कलश विसर्जन शोभायात्रा निकाली गयी। शोभायात्रा तारा सर्कल चौक तक पहुंचने के बाद पुनः वापस लौटी और बेगूसराय-रोसड़ा मुख्य पथ एस एच- 55 होते हुए तारा चौक, बरियारपुर पश्चिमी एवं मिर्जापुर चौक पहुंची।

    बूढ़ी गंडक नदी के रामघाट पर हुआ प्रतिमाओं का विसर्जन

    इसके बाद श्रद्धालु बांध के रास्ते बूढ़ी गंडक नदी के रामघाट पहुंचे, जहां वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक परंपराओं के बीच कलश के साथ भगवान श्रीकृष्ण एवं माता राधा रानी की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। विसर्जन शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर खुशी का इजहार किया तथा धार्मिक एवं भक्ति गीतों की धुन पर झूमते हुए शोभायात्रा का आनंद लिया। पूरे मार्ग में भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा।

    सात दिनों तक भक्तिमय रहा क्षेत्र का माहौल

    सात दिनों तक चले श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेले के दौरान पूरे क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय बना रहा। मेले में प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और भक्ति संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें आसपास के गांवों के हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मेला परिसर में लगी दुकानों और झूलों का बच्चों और युवाओं ने भरपूर आनंद उठाया। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

    मेला समिति ने जताया आभार

    मेला समिति के सदस्यों ने मेले और विसर्जन शोभायात्रा को सफल बनाने में सहयोग करने वाले श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। समिति के अध्यक्ष ने कहा कि जन सहयोग से ही इतने बड़े आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा सका है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि अगले वर्ष और भी भव्य रूप में इस परंपरा को आगे बढ़ाया जाएगा। इस आयोजन ने सामाजिक सौहार्द और धार्मिक एकता की मिसाल पेश की है।

    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व

    श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और मंदिरों में विशेष सजावट की जाती है। बिहार और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में इस त्योहार को मेले के रूप में मनाने की पुरानी परंपरा है, जो सामाजिक समरसता को मजबूत करती है। Wikipedia पर जन्माष्टमी के बारे में और पढ़ें।

    बेगूसराय की सांस्कृतिक विरासत

    बेगूसराय, जिसे बिहार की औद्योगिक राजधानी के रूप में जाना जाता है, की एक समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत भी है। यहां के ग्रामीण इलाकों में आज भी पारंपरिक त्योहारों को पूरे रीति-रिवाज और सामूहिक भागीदारी के साथ मनाया जाता है। तारा बरियारपुर का यह आयोजन इसी जीवंत परंपरा का एक उदाहरण है, जहां ग्रामीण जनता खुद आगे आकर व्यवस्था संभालती है और उत्सव को भव्यता प्रदान करती है।

    कलश विसर्जन धार्मिक मेला बिहार समाचार बेगूसराय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
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