अर्जुन महतो की 5 वर्षीय नतनी की मौत के बाद बछवाड़ा प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की। यह घटना बेगूसराय जिले के तेघड़ा प्रखंड अंतर्गत रात गांव पंचायत के भगवानपुर चक्की वार्ड-14 की है जहां बाढ़ के गहरे पानी में डूबने से एक मासूम बच्ची की जान चली गई।
अर्जुन महतो की 5 वर्षीय नतनी की मौत: प्रशासन की त्वरित सहायता
बेगूसराय राष्ट्र संवाद ब्यूरो तेघड़ा प्रखंड अंतर्गत रात गांव पंचायत के भगवानपुर चक्की वार्ड-14 निवासी अर्जुन महतो की 5 वर्षीय नतनी लक्ष्मी कुमारी की बाढ़ के गहरे पानी में डूबने से मौत के बाद बछवाड़ा प्रशासन ने पीड़ित परिवार को 4 लाख की सहायता दी।
अंचलाधिकारी बछवारा प्रीतम गौतम एवं अंचल नाजिर ने भगवानपुर चक्की पहुंचकर मृत बच्ची के पिता बबलू महतो को अनुग्रह अनुदान के रूप में 4 लाख रुपए का चेक सौंपा।
बछवाड़ा प्रखंड के नंबर दियारा निवासी बबलू महतो अपनी पत्नी पिंकी कुमारी और बेटी लक्ष्मी के साथ चार दिन पहले ससुराल आए थे।
खेलने के दौरान लक्ष्मी गहरे पानी में चली गई, जहां डूबने से उसकी मौत हो गई थी।
अंचलाधिकारी ने परिजन से मिलकर घटना पर दुख जताया और हरसंभव प्रशासनिक सहायता का भरोसा दिया।
उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोगों से बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतने की अपील की।
मौके पर उपमुखिया मोहम्मद इब्राईल, वार्ड सदस्य उदय महतो आदि मौजूद थे।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती
बिहार के बेगूसराय जिले में हर साल बाढ़ की स्थिति विकराल रूप ले लेती है। नदियों के उफान से गांव जलमग्न हो जाते हैं और जान-माल का भारी नुकसान होता है। इस बार भी गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। तेघड़ा, बछवाड़ा, बलिया जैसे प्रखंड बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। प्रशासन द्वारा राहत शिविर चलाए जा रहे हैं लेकिन जलभराव वाले इलाकों में बच्चों की निगरानी रखना बेहद मुश्किल हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ के दौरान अधिकांश दुर्घटनाएं असावधानी के कारण होती हैं। बच्चे खेलते-खेलते गहरे पानी में चले जाते हैं और डूब जाते हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की गाइडलाइंस के अनुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों को पानी के निकट जाने से रोकने के लिए सामुदायिक पहल जरूरी है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को लाइफ जैकेट पहनाएं और उन्हें गहरे पानी के खतरों के बारे में जागरूक करें।
सरकार की अनुग्रह अनुदान योजना से मिलती है राहत
बिहार सरकार द्वारा प्राकृतिक आपदा में मृतकों के आश्रितों को 4 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान दिया जाता है। यह राशि आपदा प्रबंधन विभाग के माध्यम से वितरित की जाती है। बछवाड़ा अंचलाधिकारी प्रीतम गौतम ने मौके पर ही चेक सौंपकर प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया। आमतौर पर इस तरह के मामलों में कागजी कार्रवाई में हफ्तों लग जाते हैं लेकिन यहां तत्परता दिखाई गई।
पीड़ित पिता बबलू महतो ने प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस राशि से परिवार को कुछ आर्थिक सहारा मिलेगा। हालांकि, कोई भी मुआवजा मासूम बेटी की कमी को पूरा नहीं कर सकता।
समुदाय की भूमिका अहम
उपमुखिया मोहम्मद इब्राईल और वार्ड सदस्य उदय महतो की उपस्थिति दर्शाती है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि भी प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। ग्रामीण स्तर पर बाढ़ पूर्व तैयारी और जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है। पंचायत स्तर पर आपदा मित्रों का गठन किया जा सकता है जो बाढ़ के दौरान निगरानी रखें और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में मदद करें।
इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर बाढ़ प्रबंधन और बाल सुरक्षा पर गंभीर चिंतन करने को मजबूर किया है। सरकार और समाज दोनों को मिलकर ऐसे उपाय करने होंगे जिससे भविष्य में कोई मासूम बाढ़ के पानी की भेंट न चढ़े। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की वेबसाइट पर बाढ़ सुरक्षा से जुड़े विस्तृत दिशानिर्देश उपलब्ध हैं जिन्हें हर नागरिक को पढ़ना चाहिए।

