लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
नई दिल्ली/रांची। भारतीय गणतंत्र के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक, पद्म भूषण, इस वर्ष झारखंड के जननायक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को मरणोपरांत प्रदान किया गया है। यह सम्मान उनके दशकों लंबे सार्वजनिक जीवन, आदिवासी समाज के उत्थान और झारखंड राज्य के निर्माण में उनके अमूल्य योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति है। मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक गरिमामय अलंकरण समारोह में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह प्रतिष्ठित शिबू सोरेन पद्म भूषण सम्मान उनकी पत्नी रूपी सोरेन को सौंपा, जो परिवार के अन्य सदस्यों, जैसे विधायक कल्पना सोरेन और अंजनी सोरेन के साथ उपस्थित थीं। यह क्षण झारखंड के लिए गर्व का और राष्ट्र के लिए एक प्रेरणादायक पल था, जिसने एक ऐसे नेता के संघर्ष और समर्पण को रेखांकित किया जिसने अपना जीवन अपने लोगों के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।
शिबू सोरेन को आदिवासी समाज के उत्थान, झारखंड आंदोलन और सार्वजनिक जीवन में उनके दशकों लंबे योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया। रामगढ़ जिले के नेमरा गांव से निकलकर उन्होंने आदिवासी अधिकारों, जल-जंगल-जमीन और अलग झारखंड राज्य की मांग को जन आंदोलन का स्वरूप दिया। यह उनकी दूरदर्शिता और अदम्य साहस का ही परिणाम था कि वे हाशिए पर खड़े समाज की आवाज बन सके और उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए अथक प्रयास किए। उनके संघर्ष ने न केवल झारखंड के आदिवासियों को एकजुट किया बल्कि उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ने की प्रेरणा भी दी।
झारखंड आंदोलन के अग्रदूत और ‘दिशोम गुरु’ का उदय
वर्ष 1972 में उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में वे पार्टी अध्यक्ष बने और झारखंड राज्य गठन आंदोलन के प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे। उनके नेतृत्व में चला यह आंदोलन, जो दशकों तक चला, आखिरकार 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य के निर्माण के साथ अपने लक्ष्य तक पहुंचा। वे कई बार सांसद रहे और तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री पद पर भी आसीन हुए, जहां उन्होंने राज्य के विकास और आदिवासी कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण नीतियों को लागू किया। उनका राजनीतिक सफर संघर्ष, समर्पण और सिद्धांतों का एक जीता-जागता उदाहरण है।
“दिशोम गुरु” के नाम से लोकप्रिय शिबू सोरेन ने टुंडी और संथाल परगना क्षेत्र में सामाजिक जागरूकता, सामूहिक खेती और शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए। उन्होंने न केवल राजनीतिक मोर्चे पर बल्कि सामाजिक और शैक्षिक उत्थान के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिससे उन्हें ‘दिशोम गुरु’ या राष्ट्र के शिक्षक की उपाधि मिली। उनका मानना था कि शिक्षा ही समाज को आगे बढ़ाने का एकमात्र मार्ग है और उन्होंने इस दिशा में अथक प्रयास किए। लंबी बीमारी के बाद 4 अगस्त 2025 को उनका निधन हो गया था, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है।
शिबू सोरेन पद्म भूषण: एक राष्ट्रव्यापी पहचान और प्रेरणा
मरणोपरांत मिला शिबू सोरेन पद्म भूषण सम्मान उनके संघर्षपूर्ण जीवन, आदिवासी समाज के प्रति समर्पण और झारखंड की पहचान के लिए किए गए ऐतिहासिक योगदान का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान माना जा रहा है। यह सम्मान न केवल शिबू सोरेन के असाधारण जीवन को श्रद्धांजलि है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए एक प्रेरणा भी है जो समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों के उत्थान के लिए कार्य करते हैं। यह दर्शाता है कि राष्ट्र उन व्यक्तियों को कभी नहीं भूलता जिन्होंने अपने जीवन को बड़े उद्देश्यों के लिए समर्पित किया है।
पद्म पुरस्कार: भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान
पद्म पुरस्कार भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण योगदान के लिए प्रदान किए जाते हैं। इन पुरस्कारों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है: पद्म विभूषण (असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए), पद्म भूषण (उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा के लिए), और पद्म श्री (किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए)। ये पुरस्कार हर साल गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित किए जाते हैं और आमतौर पर मार्च या अप्रैल में राष्ट्रपति भवन में भारत के राष्ट्रपति द्वारा एक भव्य समारोह में प्रदान किए जाते हैं। इस वर्ष, शिबू सोरेन जैसे कई असाधारण व्यक्तित्वों को उनके अनुकरणीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया, जिससे यह परंपरा जारी रही।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित दूसरे नागरिक सम्मान समारोह में 65 हस्तियों को प्रतिष्ठित पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया। इस समारोह में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी हस्तियां शामिल थीं, जिन्होंने अपने कार्यों से समाज और राष्ट्र के लिए अद्वितीय योगदान दिया है। यह सम्मान समारोह भारतीय लोकतंत्र की उस भावना का प्रतीक है जो देश के सभी कोनों से प्रतिभा और सेवा को पहचानती है और सराहिती है।
उन्होंने उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश केटी थॉमस को जन-सेवा के लिए और मलयालम पत्रकार पी. नारायणन को साहित्य और शिक्षा में योगदान के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इन नामों से पता चलता है कि पुरस्कार समिति देश के हर कोने और हर क्षेत्र से उन लोगों को चुनती है जिन्होंने चुपचाप और लगन से अपने काम को अंजाम दिया है।
इस अवसर पर, राष्ट्रपति ने पार्श्व गायिका अलका याग्निक, अभिनेता ममूटी, अमेरिकी डॉक्टर दत्तात्रेयडु नोरी, टेनिस खिलाड़ी विजय अमृतराज, उद्योगपति एसकेएम माएलानंदन और समाजसेवी व शिक्षाविद वी नटेसन को पद्म भूषण से सम्मानित किया। क्रिकेटर रोहित शर्मा और अभिनेता सतीश शाह भी उन हस्तियों में शामिल थे जिन्हें पद्म पुरस्कारों से नवाजा गया। यह सूची खेल, कला, विज्ञान, समाज सेवा और उद्योग जैसे विविध क्षेत्रों में भारत की समृद्ध प्रतिभा और योगदान को दर्शाती है।
शिबू सोरेन का जीवन और उनका कार्य झारखंड के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है। उनका संघर्ष, समर्पण और दूरदर्शिता आज भी लाखों लोगों को प्रेरित करती है। पद्म भूषण सम्मान उनकी उस विरासत को चिरस्थायी बनाता है, जो आने वाली पीढ़ियों को न्याय, समानता और अपने अधिकारों के लिए लड़ने की प्रेरणा देता रहेगा। यह सम्मान न केवल एक व्यक्ति का बल्कि एक पूरे आंदोलन का सम्मान है, जिसने एक नए राज्य को जन्म दिया और लाखों आदिवासियों के जीवन में उम्मीद की किरण जलाई। [INTERNAL_LINK_HOLDER]
अधिक जानकारी के लिए, आप भारत के पद्म पुरस्कारों के बारे में विकिपीडिया पृष्ठ पर जा सकते हैं।

