काश फूलों की सफेद चादर से सजा जमशेदपुर, शरद ऋतु और त्योहारों के आगमन का दे रहा संकेत
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर: मानसून की विदाई और शरद ऋतु के आगमन के बीच जमशेदपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों प्रकृति का मनमोहक नजारा देखने को मिल रहा है। शहर के बाहरी क्षेत्रों, धान के खेतों, नदी-नालों के किनारों, खाली मैदानों और गांवों में दूर-दूर तक फैले सफेद काश (कांस) के फूल लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। हवा के हल्के झोंकों के साथ लहराते इन फूलों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो धरती ने सफेद बर्फ की चादर ओढ़ ली हो।
प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह मौसम खास बन गया है। सुबह और शाम की सुनहरी धूप में काश के सफेद फूलों की चमक लोगों को आकर्षित कर रही है। शहर के कई युवा और परिवार इन स्थानों पर पहुंचकर तस्वीरें और वीडियो बना रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार काश फूल केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि मौसम परिवर्तन के संकेतक भी माने जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित कहावत है, “काश फूले तो वर्षा बूढ़ी हो गई”। बुजुर्गों का मानना है कि काश के फूल खिलने के बाद भारी बारिश की संभावना काफी कम हो जाती है और धीरे-धीरे मानसून विदा लेने लगता है। किसानों के लिए भी यह एक प्राकृतिक संकेत है कि धान की फसल अब पकने की अवस्था में पहुंच रही है और खेतों में अतिरिक्त पानी की आवश्यकता नहीं रह जाती।
धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी काश फूलों का विशेष महत्व है। शारदीय नवरात्र और दुर्गा पूजा के आगमन से पहले इन फूलों का खिलना शुभ माना जाता है। झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में मान्यता है कि मां दुर्गा काश के फूलों से सजे मार्गों से धरती पर आती हैं। यही कारण है कि दुर्गा पूजा के दौरान इन फूलों का उपयोग सजावट और धार्मिक अनुष्ठानों में भी किया जाता है।वनस्पति विशेषज्ञों के अनुसार काश का पौधा (वैज्ञानिक नाम Saccharum spontaneum) घास की एक प्रजाति है, जो नदियों के किनारे और खुले क्षेत्रों में स्वतः उगती है। यह मिट्टी के कटाव को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अलावा कई पक्षी और छोटे जीव-जंतु इसके बीच आश्रय प्राप्त करते हैं, जिससे यह स्थानीय जैव विविधता का भी अहम हिस्सा माना जाता है।
आसमान में छाए सफेद बादल, नीला खुला आकाश और धरती पर बिछी काश फूलों की सफेद चादर यह संदेश दे रही है कि अब वर्षा ऋतु विदा लेने वाली है और त्योहारों, खुशियों तथा उत्सवों का मौसम दस्तक दे चुका है। जमशेदपुर के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में फैला यह प्राकृतिक सौंदर्य इन दिनों लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

