मैंने इतिहास लिखा है”: सूर्य सिंह बेसरा की कविता में सत्ता, संघर्ष और युवाओं की आवाज
राष्ट्र संवाद संवाददाता
🙏💥*मैंने इतिहास लिखा है*💥🙏
— सूर्य सिंह बेसरा
जमशेदपुर, झारखंड ।
26 जुलाई, 26
(26 पंक्तियों की कविता)
मैंने 1974 के जे पी आंदोलन से सिखा है,
और 77 के सत्ता परिवर्तन भी देखा है।
मैंने 79 के असम के छात्र आंदोलन से सिखा है;
और 85 में छात्रों की सरकार को भी देखा है।
मैंने 1986 में आजसू की इबारत लिखा है;
और 89 में 72 घंटे झारखंड बंद का असर भी देखा है
मैंने 91में इस्तीफ़ा दिया, सबकी नज़रे टीका है
और 93 में सांसद रिश्वत कांड दुनिया देखा है।
मैंने GEN-Z के युवाओं से प्रेरणा सिखा है;
और श्रीलंका, बंगलादेश, नेपाल में परिवर्तन देखा है
मैंने हिटलर की तानाशाही, किताबों में लिखा है
और आज़ादी की इतिहास भी पढ़ कर सिखा है।
मैंने 2026 में कॉकरोच जनता पार्टी से भी सिखा है
और सोनम वांगचुक की अनशन को भी देखा है।
मैंने माेदी कीअंहकार और गोदी मीडिया कोभी देखा है
और धर्मेन्द्र प्रधान का भी पद से इस्तीफ़ा देखा है।
मैंने राजनीति का ज्ञान अनुभवों से सिखा है;
और अम्बेडकर ने तो भारत का संविधान लिखा है।
मैंने युवाओं की जोश, भावना और सामना देखा है
और भ्रष्टाचार में संलिप्त नेताओं को भी देखा है।
मैंने नड्डा और चड्ढा की नीयत बदलते हुए देखा है;
और जाति धर्म के नाम पर जनता को वोट देते देखा है
मैंने मुद्दों और मूल्यों की राजनीति सिखा है;
और लोकतंत्र में तो लोक ही सर्वोपरि यही लिखा है।
मैंने अभिजीत एवं करोड़ों छात्रों केलिए कविता लिखा है
और भारत का भविष्य, युवाओं के तकदीर में लिखा है
लेखक: सूर्य सिंह बेसरा
( उत्कृष्ट त्यागी विधायक सह – गीतांजलि एवं मधुशाला महाकाव्य के संताली अनुवादक तथा साहित्य अकादेमी नई दिल्ली द्वारा पुरस्कृत एवं झारखंड राज्य निर्माताओ में से एक है ) ।
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