*सरायकेला मौसीबाड़ी में दिखे विष्णु के भव्य अवतार*
*मत्स्य-कच्छप स्वरूप के दर्शन से भक्तिभाव में डूबा सरायकेला*
मृत्युंजय बर्मन,
सरायकेला,
राष्ट्र संवाद संवाददाता
सरायकेला रथयात्रा महोत्सव के दौरान मौसीबाड़ी में प्रवास कर रहे महाप्रभु श्रीजगन्नाथ ने आज भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार और बड़े भाई श्रीबलभद्र ने कच्छप (कूर्म) अवतार का दिव्य स्वरूप धारण कर श्रद्धालुओं को अलौकिक दर्शन दिए। जैसे ही मंदिर के पट खुले, “जय जगन्नाथ” के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा। प्रभु के दुर्लभ वेश के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ लगी थी। भक्तों ने श्रद्धा और आस्था के साथ महाप्रभु के श्रीचरणों में नमन कर परिवार और समाज के सुख-समृद्धि की कामना की।
मौसीबाड़ी में प्रवास के दौरान भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को प्रतिदिन अलग-अलग दिव्य स्वरूपों में सजाया जाता है। इनमें राम-बलराम, राम-परशुराम तथा मत्स्य-कच्छप वेश विशेष आकर्षण का केंद्र होते हैं। मत्स्य अवतार में भगवान जगन्नाथ और कच्छप अवतार में भगवान बलभद्र के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौसीबाड़ी पहुंचते हैं। यह परंपरा सरायकेला की रथयात्रा को अन्य स्थानों से विशिष्ट बनाती है।
धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु के दशावतारों का यह स्मरण सृष्टि की रक्षा, धर्म की स्थापना और मानव कल्याण का संदेश देता है। यही कारण है कि प्रतिदिन बदलने वाले इन अलौकिक वेशों के दर्शन के लिए न केवल जिले, बल्कि झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी हजारों श्रद्धालु सरायकेला पहुंचते हैं।
महाप्रभु के दिव्य स्वरूप की आकर्षक सज्जा गुरु सुशांत महापात्र के मार्गदर्शन में संपन्न हुई। इस सेवा में पार्थ सारथी दास, उज्ज्वल सिंह, सुमित महापात्र, दीपेश रथ, अनुभव सतपति, शुभम कर, कान्हू महापात्र तथा मुकेश साहू ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। मंदिर समिति ने सभी सेवायतों और सहयोगियों के समर्पण को रथयात्रा महोत्सव की जीवंत परंपरा का आधार बताते हुए उनके सेवा-भाव की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

