प्रथम बलिदान दिवस पर याद किये गये गणेश हांसदा, कुणाल षाड़ंगी ने अर्पित किये श्रद्धासुमन, राज्य सरकार पर लगाया शहीद की उपेक्षा का आरोप
● शहीदों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता शून्य : कुणाल
● स्थानीय जनप्रतिनिधियों व सरकार की उपेक्षा और अकर्मण्यता का प्रतिफल झेल रहा है शहीद गणेश का परिवार : कुणाल
चीन के विरुद्ध संघर्ष के क्रम में बीते वर्ष गलवान घाटी में वीरगति को प्राप्त हुए झारखंड के पूर्वी सिंहभूम के लाल गणेश हांसदा को उनके प्रथम शहादत दिवस पर लोगों ने याद किया। बहरागोड़ा के वीर सपूत को श्रद्धासुमन अर्पित करने बुधवार सुबह पूर्व विधायक सह भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी कोशाफलिया स्थित शहीद के घर पहुंचें और उनके तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर देश के प्रति उनके योगदानों को याद किया। इस दौरान कुणाल षाड़ंगी ने वीर सपूत को जनने वाले शहीद गणेश हांसदा के माता-पिता के चरण छूकर आशीर्वाद लिया और उन्हें अंगवस्त्र भेंटकर सम्मान दिया। शहीद परिवार के प्रति झारखंड सरकार की उदासीनता पर कुणाल षाड़ंगी जमकर बरसें। गणेश हांसदा की शहादत के एक वर्ष पूर्ण होने के बाद भी सरकारी वायदे अबतक अधूरे हैं। आश्रित को नौकरी, पाँच एकड़ भूमि व पीएम आवास देने का वायदा ठंडे बस्ते में है। सरकार के मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक के वायदे भी हवा हो गये। इसपर पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि शहीदों के प्रति मौजूदा झारखंड सरकार की प्रतिबद्धता शून्य है। एक ओर जहाँ केंद्र सरकार ने प्राथमिकता से सारे वायदों को पूरा कर दिया, लेकिन झारखंड सरकार के स्तर से उपेक्षा और अकर्मण्यता का प्रतिफ़ल शहीद गणेश का परिवार चुपचाप झेल रहा है। जिस वीर बेटे ने सीमा पर दुश्मन से लोहा लिया, उनका परिवार राज्य में अपनी ही सरकार की उपेक्षा से हार गया। भाजपा प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री तक कि जिम्मेदारी थी कि प्राथमिकता से शहीद गणेश हांसदा के परिवार को किये वायदे को जल्द पूरे थे, लेकिन चुनावी जुमले की तरह ही शहीद के परिवार को भी झूठे वायदे कर दिये गए। कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि ज़िले के उपायुक्त और राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं इस मामले को संज्ञान में लेकर शहीद गणेश हांसदा के परिवार से किये गये वादे को जल्द पूर्ण करने की दिशा में पहल करने का आग्रह किया। कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि ऐसी क्या मजबूरियाँ रही कि शहीद के परिवार को एक अदद गैस का कनेक्शन तक नहीं मिल पाया, वहीं घोषणाएं थी पाँच एकड़ जमीन और पेट्रोल पंप दिलवाने की। शहीद के 70 वर्षीय पिता सुखदा हांसदा अबतक वृद्धापेंशन से वंचित हैं। कुणाल ने कहा कि शहीद की ऐसी उपेक्षा होगी तो कोई माँ अपने बेटे को बॉर्डर पर नहीं जाने देंगी। प्रथम बलिदान दिवस के मौके पर कोशाफलिया गांव में नई ज़िंदगी, जमशेदपुर और VBDA, झारखंड के संयुक्त तत्वावधान में रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ जिसमें युवाओं और स्थानीय लोगों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। खराब मौसम के बावजूद भी लोगों ने रक्तदान शिविर को सफल बनाया। उक्त रक्तदान शिविर का उद्घाटन बतौर मुख्यातिथि पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने किया।

