झारखंड में धान बेचने को किसान भटकने को मजबूर।
राष्ट्र संवाद संवाददाता
झारखंड में धान अधिप्राप्ति को लेकर इन दिनों गंभीर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। एक ओर प्रेस मीडिया में लगातार यह खबरें सामने आ रही हैं कि धान खरीद की अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है, वहीं दूसरी ओर सरकार या संबंधित विभाग की ओर से अब तक कोई स्पष्ट आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। इस विरोधाभासी स्थिति का सीधा असर राज्य के किसानों पर पड़ रहा है।

केंद्रों का चक्कर, फिर भी समाधान नहीं
जमीनी स्तर पर हालात बेहद चिंताजनक हैं। किसान अपनी उपज बेचने के लिए बार-बार लैम्पस (LAMPS) और पैक्स (PACS) केंद्रों का चक्कर लगाने को मजबूर हैं। तिथि को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं होने के कारण कई किसानों को बिना धान बेचे ही लौटना पड़ रहा है। इससे उनका समय, श्रम और संसाधन—तीनों व्यर्थ हो रहे हैं, साथ ही आर्थिक नुकसान की आशंका भी लगातार बढ़ रही है।
पूर्वी सिंहभूम के किसानों में सबसे ज्यादा परेशानी
पूर्वी सिंहभूम जिले, जिसे धान का कटोरा भी कहा जाता है, यहां के किसानों का कहना है कि यदि तिथि बढ़ाने का निर्णय लिया गया है तो उसे तत्काल सार्वजनिक किया जाना चाहिए। वहीं, यदि ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है, तो भी सरकार को स्पष्ट रूप से स्थिति सामने रखनी चाहिए, ताकि किसानों में भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
विभाग की चुप्पी ने बढ़ाई मुश्किलें
इस पूरे मामले में संबंधित विभाग की चुप्पी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। स्पष्ट दिशा-निर्देश के अभाव में न केवल किसान असमंजस में हैं, बल्कि खरीद केंद्रों पर कार्यरत कर्मचारी भी उचित निर्णय लेने में असमर्थ नजर आ रहे हैं।
राज्यभर से मिल रही शिकायतें
राज्य के विभिन्न जिलों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं कि किसान धान बेचने के लिए लंबी दूरी तय कर केंद्रों तक पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां भी उन्हें कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पा रही है। इससे किसानों में नाराजगी और चिंता दोनों बढ़ती जा रही है।
किसानों की मांग
किसानों ने सरकार से मांग की है कि धान अधिप्राप्ति की तिथि को लेकर जल्द से जल्द आधिकारिक अधिसूचना जारी की जाए तथा सभी खरीद केंद्रों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

