Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » लोकतांत्रिक मूल्यों एवं प्रेस की आजादी और निष्पक्षता के लिए गंभीर खतरा है फेक न्यूज: डीवाई चंद्रचूड़
    Breaking News Headlines राष्ट्रीय

    लोकतांत्रिक मूल्यों एवं प्रेस की आजादी और निष्पक्षता के लिए गंभीर खतरा है फेक न्यूज: डीवाई चंद्रचूड़

    Devanand SinghBy Devanand SinghMarch 23, 2023No Comments4 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

     

     

    दिल्ली  -:  भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने कार्यक्रम में कहा कि डिजिटल युग में फेक न्यूज विभिन्न समुदायों के बीच तनाव पैदा कर सकती हैं. फेक न्यूज से लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है. वहीं मीडिया ट्रायल के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि कई बार ऐसा हुआ है कि मीडिया ने आरोपी को अदालत का फैसला आने से पहले ही जनता की नजरों में दोषी के तौर पर पेश कर दिया. उन्होंने कहा कि हर संस्था चुनौती का सामना कर रहा है और पत्रकारिता की अपनी ही चुनौती है.

     

     

     

    प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि मौजूदा समाज में फेक न्यूज प्रेस की आजादी और निष्पक्षता के लिए गंभीर खतरा है. यह पत्रकारों के साथ-साथ हितधारकों की सामूहिक जिम्मेदारी है कि वह रिपोर्टिंग की प्रक्रिया के दौरान किसी पक्षपात या पूर्वाग्रह को दूर रखें, फेक न्यूज एक बार में लाखों लोगों को गुमराह कर सकती हैं और यह लोकतंत्र के मौलिक सिद्धांतों के विपरीत होगा जो हमारे अस्तित्व के नींव का निर्माण करती हैं. जस्टिस चंद्रचूड़ ने जिम्मेदार पत्रकारिता को इंजन करार दिया जो लोकतंत्र को बेहतर भविष्य की ओर ले जाती है. उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पत्रकारिता इंजन की तरह काम करती है जो लोकतंत्र को बेहतर कल की ओर ले जाती है. डिजिटल युग में पहले से कहीं अहम है कि पत्रकार सटीक, निष्पक्ष, जिम्मेदार और निभज़्य होकर पत्रकारिता करें.

     

     

     

     

    जस्टिस चंद्रचूड़ ने जोर देकर कहा कि क्रियाशील और स्वस्थ लोकतंत्र एक संस्थान के तौर पर हमेशा पत्रकारिता के विकास को प्रोत्साहित करता है जो संस्थाओं से कड़े सवाल पूछ सके या आसान भाषा में कहें तो सत्ता के सामने सच्चाई कह सके. किसी भी लोकतंत्र की गतिशीलता से तब समझौता होता है जब प्रेस को ऐसा करने से रोका जाता है. देश के लोकतांत्रिक रहने के लिए प्रेस को स्वतंत्र बने रहना चाहिए. सीजेआई ने कहा कि वह भय से युक्त समय था, लेकिन साथ ही वह निर्भीक पत्रकारिता के उदय के लिए भय विहीन समय भी था. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि 25 जून 1975 हमारे इतिहास का एक अहम क्षण था. उन्होंने कहा कि एक घोषणा ने स्वतंत्रता और इसके लिए खतरों की हमारी धारणाओं को परिभाषित और पुनर्परिभाषित किया और यह भी बताया कि यह कितना कमजोर हो सकता है.

     

     

     

    जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि सच्चाई और झूठ के बीच अंतर को दूर करने और पुल बनने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि फेक न्यूज में समुदायों के बीच तनाव पैदा करने की क्षमता है, इसलिए ये हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों को खतरे में डाल रही है. प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि पत्रकारों और वकीलों में कुछ चीजें ऐसी हैं जो समान हैं. उन्होंने कहा कि दोनों मानते हैं कि तलवार से अधिक ताकतवर कलम होती है. उन्होंने कहा कि अगर देश में लोकतंत्र रहना है तो प्रेस को स्वतंत्र होना होगा. अखबार ऐतिहासिक रूप से सामाजिक और राजनीतिक बदलावों के लिए उत्प्रेरक रहे हैंयौन उत्पीडऩ के खिलाफ अमेरिका से शुरू अभियान ‘मी टूÓ का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि मी टू का प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ा और यह इतिहास की अहम घटना थी. भारत में दिल्ली के कुछ लोगों द्वारा ज्योति और निर्भया दुष्कर्म कांड को अंजाम देने के बाद हुई मीडिया कवरेज का नतीजा था कि बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए और बाद में फौजदारी कानून में सुधार हुआ. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि एक नागरिक के तौर पर संभव है कि हम पत्रकारों द्वारा अपनाए गए रुख या निकाले गए निष्कर्ष से सहमत नहीं हों. मैं भी कई पत्रकारों से असहमत होता हूं. अंतत: ऐसा कौन है जो सभी लोगों से सहमत होता है? लेकिन असहमति नफरत में नहीं बदलनी चाहिए और नफरत को हिंसा में तब्दील होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleदुबई से मुंबई आ रही इंडिगो एयरलाइन की फ्लाइट में शराब पीकर दो यात्रियों ने किया हंगामा
    Next Article तीसरे वनडे में ऑस्ट्रेलिया ने 21 रन से हराया, घर में 26 सीरीज बाद हारा भारत, सूर्या की जीरो की हैट्रिक

    Related Posts

    ब्रह्मर्षि विकास मंच बागबेड़ा इकाई की बैठक संपन्न, समाज के बीच पहुंचकर शिक्षा और जनसमस्याओं पर काम करने का लिया संकल्प

    June 20, 2026

    गोलमुरी पुलिस केंद्र में नवनिर्मित पुलिस परिवार बाल उद्यान का उद्घाटन, वृक्षारोपण भी किया गया

    June 19, 2026

    जन शिकायत निवारण दिवस में उपायुक्त ने सुनीं लोगों की समस्याएं, समयबद्ध समाधान के दिए निर्देश

    June 19, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    ब्रह्मर्षि विकास मंच बागबेड़ा इकाई की बैठक संपन्न, समाज के बीच पहुंचकर शिक्षा और जनसमस्याओं पर काम करने का लिया संकल्प

    गोलमुरी पुलिस केंद्र में नवनिर्मित पुलिस परिवार बाल उद्यान का उद्घाटन, वृक्षारोपण भी किया गया

    जन शिकायत निवारण दिवस में उपायुक्त ने सुनीं लोगों की समस्याएं, समयबद्ध समाधान के दिए निर्देश

    NTA रद्द करने और रोजगार की मांग को लेकर AIDSO का साकची में प्रदर्शन

    बाप ने जिंदा बेटी का किया अंतिम संस्कार

    लातेहार बालूमाथ में दर्दनाक हादसा: गड्ढे में डूबने से एक ही परिवार के तीन मासूमों की मौत, गांव में मातम

    परिमल नाथवानी की बड़ी जीत: झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 में रचा इतिहास

    रणनीति: झारखंड में भाजपा की सत्ता वापसी का मार्ग?

    पुणे में राधामोहन मिश्रा की गिरफ्तारी: अंधभक्ति का सच

    झारखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना: रघुवर दास का श्रेय

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.