केंद्र सरकार अब तक अपने विरोधी राजनीतिक दलों को विरोध करने पर निशाने पर ले रही थी परंतु अब स्ट्रीम मीडिया जिन्हें हम गोदी मीडिया की भी संज्ञा दे सकते हैं को छोड़कर बड़े पैमाने पर मीडिया हाउस को बंद करने के लिए एक तुगलकी फरमान जारी किया है जबकि लीड इंडिया पब्लिशर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष सिंह और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देवानंद सिंह ने सूचना प्रसारण मंत्री से मिलकर क्षेत्रीय अखबारों के अस्तित्व को बचाने के लिए विज्ञापन नीति के साथ-साथ यह भी बताने का काम किया था
कि RNI से रजिस्टर्ड पत्र- पत्रिकाओं को किस तरह एक नीति बनाकर उसके अस्तित्व को बचाया जा सकता है लिपा ने अपने राष्ट्रीय अधिवेशन में यह प्रस्ताव पास कराया था कि सभी प्रदेश के आर एन आई से रजिस्टर्ड कम से कम 2000 छापे और इस पर केंद्र सरकार हर माह कम से कम पत्र पत्रिकाओं को बचाने के लिए एक विज्ञापन देने का काम करेगी केंद्र सरकार ने इस पर तो अमल नहीं किया बल्कि उन्हें 2024 के आने वाले चुनाव में लग रहा है कि लघु पत्र पत्रिकाएं जो समय-समय पर केंद्र सरकार के खिलाफ मुखर हो रही है चुनाव में और कड़े तेवर के साथ मुखर होंगे इसके मद्देनजर 25 सितंबर 2023 को एक अधिसूचना जारी किया गया
जिसे अवलोकन करने पर यह साफ-साफ पता चलता है कि केंद्र सरकार अपने खिलाफ उठ रहे हर आवाज को दबाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं लीपा ने राष्ट्र संवाद की साप्ताहिक (5 – 11 जनवरी 2015 ) के अंक में डीएवीपी में विज्ञापन का महा घोटाला नामक शीर्षक के माध्यम से सरकार के खिलाफ मुखर हुआ था क्रमशः

