50 साल पुराने जमीन विवाद में फंसा यूसील अस्पताल का विकास
*35 लाख के मुख्य गेट समेत कई निर्माण कार्य ठप, हड़ताल से उत्पादन भी प्रभावित*
राष्ट्र संवाद संवाददाता, जादूगोड़ा
यूसील के गठन के दौरान जमीन अधिग्रहण के बदले पूरा मुआवजा और रोजगार नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए विस्थापित महिला आशा उरांव करीब 50 वर्षों से संघर्ष कर रही हैं। उनका कहना है कि परिवार को रोजगार मिलने तक वह अपनी जमीन पर विकास कार्य नहीं होने देंगी।
यूसील प्रबंधन के अनुसार, महिला के विरोध के कारण अस्पताल में एक्स-रे भवन का निर्माण 10 वर्षों से अधिक समय से रुका है। टाइल्स लगाने और सुंदरीकरण का काम भी प्रभावित है। हाल में 35 लाख रुपये की लागत से बन रहे मुख्य गेट का निर्माण भी रोक दिया गया। अधूरे गेट में निकले सरिये दुर्घटना का खतरा पैदा कर रहे हैं। बताया जाता है कि विवादित जमीन पर महिला ने घर बनाने के साथ खेती भी शुरू कर दी है।
प्रबंधन ने महिला को मनाने के प्रयास किए और थाने में कई बार लिखित शिकायत दी, लेकिन समाधान नहीं निकला। महिला उपायुक्त से मुख्यमंत्री तक शिकायत कर चुकी हैं और कई बार आंदोलन भी किया है। यूसील अधिकारी राकेश कुमार समेत प्रबंधन का कहना है कि निर्माण कार्य रुकने से अस्पताल के विकास में बाधा आ रही है।
दूसरी ओर, विस्थापितों और ठेका मजदूरों की बार-बार हड़ताल से कंपनी का उत्पादन भी घट रहा है। जमीन विवाद और हड़ताल, दोनों नए सीएमडी के लिए चुनौती बने हैं। आशा उरांव का कहना है कि जमीन देने के बाद भी उनका परिवार रोजगार से वंचित है और वह दूसरों के घरों में काम कर गुजारा कर रही हैं। विवाद सुलझाने के लिए जिला प्रशासन की मध्यस्थता में प्रबंधन और महिला के बीच वार्ता जरूरी है।

