राष्ट्र संवाद संवाददाता
पोटका। केरूआडूंगरी ग्राम पंचायत के मुखिया कान्हू मुर्मू ने आज एईसीएस (AECS), तुरामडीह, सुंदरनगर के प्राचार्य को एक औपचारिक पत्र सौंपकर विद्यालय के पाठ्यक्रम में संताली भाषा को तृतीय भाषा के रूप में शामिल करने का अनुरोध किया है।
मुखिया श्री कान्हू मुर्मू ने कहा कि संताली भाषा भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल एक मान्यता प्राप्त भाषा है और यह देश की समृद्ध आदिवासी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पूर्वी सिंहभूम क्षेत्र में बड़ी संख्या में संताली भाषी विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनके लिए अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति (NEP-2020) भी मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देती है। विद्यालय में संताली भाषा को शामिल करने से विद्यार्थियों की भाषाई क्षमता का विकास होगा, उनकी सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी तथा वे अपनी परंपराओं और जड़ों से और अधिक जुड़ सकेंगे।
मुखिया श्री कान्हू मुर्मू ने विद्यालय प्रबंधन से आग्रह किया कि सीबीएसई के नियमों एवं दिशा-निर्देशों के अनुरूप कक्षा 6 से 10 तक संताली भाषा को तृतीय भाषा के रूप में प्रारंभ करने हेतु आवश्यक पहल की जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विद्यालय प्रशासन इस मांग पर सकारात्मक विचार करते हुए क्षेत्र के विद्यार्थियों और अभिभावकों की भावनाओं का सम्मान करेगा।
इस पहल का स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों एवं संताली समाज के लोगों ने स्वागत किया है और इसे आदिवासी भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

