- एमएमडीआर संशोधन विधेयक के विरोध में भूमिज समाज, ग्रामसभा के अधिकार की मां
राष्ट्र संवाद संवाददाता
पोटका। एमएमडीआर संशोधन विधेयक, 2026 के विरोध में भूमिज समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था से जुड़े प्रतिनिधियों ने आवाज बुलंद की है। तेंतला में पत्रकार वार्ता कर उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन के साथ खनिज संपदा पर भी पहला अधिकार स्थानीय ग्रामसभा का होना चाहिए।
प्रतिनिधियों ने कहा कि खनन से होने वाले लाभ में स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित हो। खनन के कारण विस्थापन, रोजगार, प्रदूषण और कृषि भूमि के नुकसान जैसी समस्याओं का सामना ग्रामीणों को करना पड़ता है, इसलिए उनके अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने राज्य के खनिज राजस्व और अधिकारों को सीमित किए जाने पर भी चिंता जताते हुए कहा कि इससे विकास योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा, “खान हमारा, राज तुम्हारा—यह नहीं चलेगा।”
पत्रकार वार्ता में विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक सरदार, मुड़ा, नाया एवं डाकुआ स्वशासन व्यवस्था से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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‘जल, जंगल, जमीन के साथ खनिज पर भी ग्रामसभा का अधिकार’
तेंतला में आयोजित पत्रकार वार्ता में समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि जल, जंगल और जमीन के साथ-साथ क्षेत्र में उपलब्ध खनिज संपदा पर भी सबसे पहला अधिकार स्थानीय ग्रामसभा का होना चाहिए। इसके बाद ही राज्य सरकार और केंद्र सरकार की भूमिका तय होनी चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज सदियों से अपनी पारंपरिक स्वशासन एवं ग्रामसभा व्यवस्था के माध्यम से गांवों के सामाजिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करता आया है।

