25 मार्च को अदालत में टकराएंगे कॉरपोरेट बनाम जनप्रतिनिधि
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जनप्रतिनिधि बनाम कॉरपोरेट की लड़ाई एक बार फिर झारखंड की राजनीति में चर्चा का विषय बन गई है। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय पर अंतरराष्ट्रीय कंपनी मेनहार्ट (Meinhardt) की भारतीय इकाई ने 100 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दायर किया है। राजनीतिक और पत्रकारिता जगत में यह भी चर्चा है कि सरयू राय जिस मुद्दे को उठाते हैं, उसे तार्किक अंजाम तक पहुंचाने की क्षमता भी रखते हैं, ऐसे में यह कानूनी लड़ाई आने वाले दिनों में और तीखी हो सकती है।
जमशेदपुर:जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय पर अंतरराष्ट्रीय कंपनी मेनहार्ट (Meinhardt) की भारतीय इकाई ने 100 करोड़ रुपये की मानहानि का मुकदमा दायर किया है। अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए विधायक को नोटिस जारी किया है और सुनवाई की तिथि 25 मार्च 2026 निर्धारित की है।
यह विवाद करीब दो दशक पुराने रांची सीवरेज-ड्रेनेज परियोजना से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2005-06 में रांची नगर निगम के सीवरेज-ड्रेनेज सिस्टम के लिए डीपीआर तैयार करने के लिए मेनहार्ट इंडिया को परामर्शी नियुक्त किया गया था। उस समय सरयू राय ने विधानसभा में चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया था।
बताया जाता है कि कंपनी को करीब 21 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। बाद में सीएजी की रिपोर्ट में डीपीआर के उपयोग को सीमित बताते हुए कई सवाल खड़े किए गए और नए सर्वेक्षण के बाद परियोजना को प्रभावी नहीं माना गया। इस परियोजना की लागत 359 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई थी, लेकिन कई क्षेत्रों में काम अधूरा ही रह गया।
इस मामले को लेकर लॉकडाउन के दौरान सरयू राय ने दस्तावेजों के आधार पर “लम्हों की खता” नामक पुस्तक लिखी, जिसमें मेनहार्ट चयन प्रकरण और कथित अनियमितताओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है। यह पुस्तक उनकी वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।
कंपनी ने वर्ष 2023 में हाईकोर्ट में राय की वेबसाइट और बयानों के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद मामला निचली अदालत में पहुंचा, जहां अब 100 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा किया गया है।
नोटिस मिलने के बाद सरयू राय ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “20 साल बाद उन्हें मानहानि का अहसास हुआ है। मैं अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ूंगा।” उन्होंने इसे पुराने भ्रष्टाचार को दबाने की कोशिश बताते हुए कहा कि यह मामला कॉरपोरेट दबाव बनाम जनप्रतिनिधि की लड़ाई बन गया है।
मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी, जिस पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं।

