होलाष्टक को लेकर अक्सर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी रहती है। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, कश्मीर और सिंध प्रांत में मान्य होता है, जहां इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते। इन क्षेत्रों की धार्मिक परंपराओं और स्थानीय पंचांग के आधार पर ही होलाष्टक का पालन किया जाता है। हालांकि इन प्रदेशों को छोड़कर भारत के अन्य अधिकांश भागों में होलाष्टक की परंपरा लागू नहीं मानी जाती और वहां शुभ कार्य सामान्य रूप से संपन्न होते रहते हैं। विद्वानों का कहना है कि धार्मिक निर्णय लेते समय केवल इंटरनेट या गूगल की जानकारी पर निर्भर रहने के बजाय अपने क्षेत्र के ज्योतिषी और स्थानीय पंचांग की मान्यता को प्राथमिकता देनी चाहिए। अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराएं और मान्यताएं भिन्न होती हैं, इसलिए धार्मिक कार्य स्थानीय परंपरा के अनुसार ही करना उचित माना जाता है।

