लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
केंद्र सरकार के निर्देश पर एफसीआई गोदामों के पुनर्गठन के फैसले के विरोध में शुक्रवार को जमशेदपुर के बर्मामाइंस स्थित एफसीआई गोदाम के बाहर मजदूरों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने मुख्य गेट पर धरना देते हुए राशन उठाव का कार्य कुछ समय के लिए पूरी तरह ठप कर दिया। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन वितरण की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
एफसीआई गोदामों के पुनर्गठन का मजदूरों पर प्रभाव
सरकार की नई व्यवस्था के अनुसार अब पीडीएस डीलर सीधे एफसीआई गोदाम से राशन उठाएंगे। इसके साथ ही शहर के साकची, करनडीह और बर्मामाइंस स्थित तीनों एफसीआई गोदामों की व्यवस्था को समेटकर केवल बर्मामाइंस गोदाम से ही राशन वितरण करने का निर्णय लिया गया है।
इस फैसले से तीनों गोदामों में वर्षों से माल ढुलाई का कार्य कर रहे करीब 60 मजदूरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का कहना है कि वे लंबे समय से इसी कार्य के माध्यम से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद उनका रोजगार छिन जाएगा और परिवार के सामने आर्थिक संकट उत्पन्न हो जाएगा।
मजदूरों ने सरकार से पुनर्गठन के फैसले पर पुनर्विचार करने, उनकी नौकरी सुरक्षित रखने तथा वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था करने की मांग की। प्रदर्शन के कारण गोदाम से राशन उठाव की प्रक्रिया कुछ समय तक प्रभावित रही। मजदूरों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
पीडीएस व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा पर असर
भारतीय खाद्य निगम (FCI) देश की खाद्य सुरक्षा का मुख्य स्तंभ है और इसके गोदामों का पुनर्गठन सीधे तौर पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की दक्षता को प्रभावित करता है। जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर में जहां बड़ी आबादी राशन कार्ड धारक है, वहां गोदामों का केंद्रीकरण परिवहन लागत और समय बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना वैकल्पिक रोजगार योजना के मजदूरों को हटाना सामाजिक असुरक्षा को बढ़ावा देगा।
मजदूर संगठनों की प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति
स्थानीय मजदूर यूनियनों ने इस कदम को एकतरफा बताते हुए श्रम कानूनों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वर्षों से कार्यरत मजदूरों को बिना नोटिस या मुआवजे के हटाना गैरकानूनी है। यूनियन नेताओं ने जिला प्रशासन और एफसीआई प्रबंधन को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। यदि वार्ता विफल रही तो आंदोलन को राज्यव्यापी बनाने की चेतावनी दी गई है।
इस मामले में भारतीय खाद्य निगम (FCI) की आधिकारिक वेबसाइट पर अधिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है। FCI Official Website

