विश्व रेडियो दिवस पर चिन्मय महतो ने साझा किए 60 वर्षों के रेडियो अनुभव
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर गाइड इंटरनेशनल रेडियो लिस्नर्स क्लब के अध्यक्ष चिन्मय महतो ने रेडियो के महत्व, इतिहास और अपने छह दशकों के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि सन् 1920 में जब पहली बार रेडियो के माध्यम से समाचार प्रसारित हुआ था, तब यह दुनिया के लिए एक अद्भुत और आश्चर्यजनक घटना थी। उस समय रेडियो रखना सम्मान की बात माना जाता था, जबकि आज आधुनिक तकनीक के बावजूद वह विशिष्ट पहचान दुर्लभ हो गई है।

उन्होंने बताया कि समय के साथ रेडियो की जड़ें पूरी दुनिया में बरगद के पेड़ की तरह मजबूत होती चली गईं और यह मानव जीवन का अभिन्न अंग बनकर लोगों का सच्चा जीवनसाथी बन गया। रेडियो ने समाज का आईना और एक शक्तिशाली संचार माध्यम के रूप में अपनी पहचान बनाई है। विभिन्न भाषाओं में समाचार, संगीत और खेलकूद के प्रसारण ने सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक एकता को मजबूती दी।
चिन्मय महतो ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे भारतीय समाज में लंबे समय तक सक्रिय रेडियो श्रोता रहे हैं। पिछले 60 वर्षों से उनका रेडियो से गहरा लगाव रहा है। इस दौरान उन्होंने देश-विदेश के रेडियो प्रसारण केंद्रों को हजारों पोस्टकार्ड और पत्र भेजकर अपनी प्रतिक्रियाएं और फरमाइशी गीतों की मांग की है, जो आज भी जारी है।
उन्होंने बताया कि उन्हें रेडियो संग्रह करने का भी शौक है और अब तक उनके पास करीब 992 विभिन्न प्रकार के रेडियो सेट मौजूद हैं। इनसे उन्होंने एक “मिनी रेडियो म्यूजियम” तैयार किया है, ताकि नई पीढ़ी को रेडियो उपकरणों के इतिहास और विकास के बारे में जानकारी मिल सके। हर वर्ष विश्व रेडियो दिवस पर वे छात्र-छात्राओं के लिए विशेष कार्यक्रम का आयोजन भी करते हैं।
इस वर्ष विश्व रेडियो दिवस की थीम “रेडियो एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कोई व्यक्ति रेडियो म्यूजियम के लिए रेडियो सेट दान करना चाहता है तो वे अवश्य सहयोग करें।
चिन्मय महतो ने अपने संदेश के अंत में कहा कि रेडियो उनके जीवन का अहम हिस्सा है और वे हमेशा से “आई लव रेडियो” के भाव के साथ इस माध्यम से जुड़े रहे हैं।

