चांडिल अंचल कार्यालय कर्मचारी बेलगाम , बिना सुविधा शुल्क कोई काम नहीं ?
आदिवासी युवक नामांतरण के लिए 1 वर्ष दर दर भटक रहा है राजेश मांझी
राष्ट्र संवाद संवाददाता
चांडिल चांडिल अंचल कार्यालय कर्मचारी बेलगाम , बिना सुविधा शुल्क कोई काम नहीं ? अंचल कार्यालय कार्यालय में भूमाफिया दलालों का कब्जा, बिना सुविधा शुल्क कोई काम नहीं होगा , काटते रहिए चक्कर . जानिए रिश्वत के विरुद्ध आवाज उठाने वाले कैसे अंचल कार्यालय कर्मी मानसिक रूप से कर रहे प्रताड़ित आदिवासी राजेश मांझी द्वारा
*जानकारी साझा के अनुसार, भूमि नामांतरण (म्यूटेशन) का , जानिए क्या है पूरा मामला -**
वादी (पीड़ित )राजेश मांझी पिता सुकराम मांझी,निवासी ग्राम क़दमदीह चांडिल पंचायत ,की जमीन – मौजा दालग्राम ,खाता संख्या – 38,39,40,41, प्लॉट संख्या – 46ए,70ए,67ए,45ए,316ए,323ए,367ए,364ए,364ए,कुल रकवा, – 1 एकड़,13.5 डी. भूमि का ऑन लाइन अपलाई,परिशोधन 10- 01- 25 को किया था. वर्ष हो गए ,अंचल कार्यालय के अंचल अधिकारी, कर्मचारी , आदि केवल तरह तरह के बहाने बना कर चक्कर कटवा रहे है . *जानिए क्यों अंचल कार्यालय का* चक्कर लगवा रहे है – राजेश मांझी के द्वारा 8 जुलाई 2025 निगरानी विभाग की सूचित किया था कि अंचल कार्यालय कर्मचारी सन्नी बर्मन द्वारा 70 हजार रुपए मांगे थे ,जिसमे अग्रिम तौर पर 10 हजार रुपए रिश्वत लेते निगरानी विभाग ने चांडिल गोलचक्कर में दबोच लिया . इतना सब होने के बाद भी अंचल कार्यालय के कर्मचारियों दुस्साहस कहा जाय तो कम नहीं होंगा , पीड़ित राजेश मांझी अंचल कार्यालय का मैराथन चक्कर लगा रहा है . और आश्चर्य ये कि आदिवासी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गरीब गुरबा के जीवनस्तर को विकसित करने के लिए प्रयास रात है लेकिन , ममेरा गांव अंचल कार्यालय के अधिकारी ओर कर्मचारी कितने बेलगाम है ,अब इसके आगे कुछ लिखने की जुर्रत प्रतीत नहीं होती है. पीड़ित राजेश मांझी का कसूर ये है कि उसने पुरे सिस्टम के विरुद्ध उसने थक हार कर तत्कालीन कर्मचारी सन्नी बर्मन द्वारा रिश्वत मांगे जाने की शिकायत निगरानी विभाग से कर दी थी. जिसकी सजा बतौर अंचल कार्यालय में रोजाना नाक रगड़वा रहे है,मजदूर गरीब मजदूरी छोड़कर भटकने को मजबूर हो गया है ? ये कोई अकेला उदाहरण नहीं है ऐसे दर्जनों आवेदन 1 वर्ष से अधिक हो गया , नापी,म्यूटेशन,आदि के लिए चक्कर लगा रहे है.अंचल कार्यालय से लेकर अनुमंडल कार्यालय तक फैले हुए है अधिकृत दलाल ?
वहीं आम जनता सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर आक्रोशित नजर आ रही है।

