सीसीएल का केंद्रीय अस्पताल ढ़ोरी लापरवाही और लचर इंतजाम ने ली मासूम की जान!
राष्ट्र संवाद संवाददाता
किसी घर का चिराग अगर इलाज़ न मिलने या इंतजाम न होने या फिर लापरवाही के चलते अपनी सांसे छोड़ दें तो सोचिये क्या हाल उस परिवार का होगा. क्या गुजरती होंगी और क्या जिंदगी भर का जख्म दें दिया गया होगा. इस पीड़ा क़ो तो सहन नहीं किया जा सकता और न ही उस न भूलने वाले मंजर और गम क़ो ही भुलाया जा सकता हैं.
ऐसी ही तस्वीर और वाक्या हुआ, जिसमे एक़ बच्चे की जान चली गई. बोकारो जिला के बेरमो में सीसीएल केंद्रीय अस्पताल ढोरी में इलाज़ के लिए बच्चे क़ो लाया गया था. लेकिन वहां से रेफेर बोकारो कर दिया गया. परिजनों का अरोप हैं कि जिस सिलेंडर के सहारे मासूम की सांस टिकी थी. वह बोकारो जाने के दौरान ही बीच में खत्म हो गई, लिहाजा मासूम की सांसे अस्पताल पहुंचने से पहले ही उखड़ गई और इस दुनिया क़ो छोड़ चला गया. एक़ अस्पताल की खामियों का खामियाजा एक़ मासूम और उसका परिवार नें भुगतान किया.. परिजनों का मानना हैं कि ऑक्सीजन सिलेंडर भरे होने से बच्चे की जान बच सकती थी.
रेफर -रेफर का चस्पा तो पहले ही केंद्रीय अस्पताल ढोरी के माथे पर लगा हैं. यहां इलाज़ के लिए मुक़्क़मल इंतजाम का रोना तो पहले से ही रोया जाता राहा हैं. लेकिन सवाल हैं कि कब तक जिम्मेदारियों से बचते रहेंगे. कब तक ऐसे ही वाक्यों क़ो निहारते रहेंगे.
इस मासूम की मौत नें ढेरों सवाल लचर स्वास्थ्य इंतजाम की खोल दी हैं.
अब देखना हैं कि कब इस पर गौर फ़रमाया जायेगा. कब हमारे माननीय और मुलाजिम की नजरें इस गंभीर समस्या पर इनायत होती हैं. सवाल ये भी हैं कि सिर्फ अस्पताल होने से नहीं होगा बल्कि इंतजाम भी पुख्ता होने चाहिए।

