कम ब्याज और बिना गारंटी करोड़ों रुपये का ऋण दिलाने का झांसा देकर लोगों से रकम ऐंठने के आरोपित बृजेश तिवारी को जबलपुर पुलिस ने मुंबई के अंधेरी वेस्ट से गिरफ्तार किया है. मदन महल पुलिस की कार्रवाई के बाद आरोपित को जबलपुर लाया गया है. पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बृजेश केवल जबलपुर में ही सक्रिय नहीं था, बल्कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और बंगाल में भी लोगों को ऋण दिलाने के नाम पर कथित तौर पर ठगी का शिकार बना चुका है. पुलिस को आशंका है कि जांच आगे बढ़ने पर पीड़ितों की संख्या और ठगी की रकम बढ़ सकती है.
पुलिस के अनुसार, आरोपित लोगों के सामने खुद को प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में पेश करता था. वह दावा करता था कि प्रशासन के बड़े अधिकारियों और प्रभावशाली धर्मगुरुओं से उसकी सीधी पहुंच है. इसी प्रभाव का इस्तेमाल कर वह लोगों को बड़े ऋण मंजूर कराने का भरोसा देता था. विश्वास कायम होने के बाद प्रोसेसिंग फीस, स्टाम्प ड्यूटी और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर रकम मांगी जाती थी. रकम मिलने के बाद ऋण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बजाय वह पीड़ितों से और पैसे मांगता था.
15 करोड़ के ऋण का दिया था भरोसा
मदन महल थाना क्षेत्र में सामने आए मामले में होटल व्यवसायी संजय भाटिया उर्फ नीटू को 15 करोड़ रुपये का ऋण दिलाने का भरोसा दिए जाने का आरोप है. पुलिस के मुताबिक बृजेश ने कम ब्याज और बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराने की बात कही थी. ऋण की प्रक्रिया के नाम पर उसने होटल व्यवसायी से करीब नौ लाख रुपये ले लिए.
बताया गया है कि इसके बाद आरोपित ने छह लाख रुपये और देने की मांग की. होटल व्यवसायी ने अतिरिक्त रकम देने से मना कर दिया और पहले दिए गए पैसे वापस मांगे. आरोप है कि यहीं से बृजेश का दूसरा रूप सामने आया. रकम लौटाने के बजाय वह कथित तौर पर धमकी देने लगा. पुलिस के अनुसार, पीड़ित को यह कहकर डराया गया कि उसकी ऊंची पहुंच है और वह शूटर भेजकर हत्या तक करवा सकता है.
मामले की शिकायत पुलिस तक पहुंचने के बाद जांच शुरू हुई और पुलिस ने आरोपित की तलाश तेज की. जांच के दौरान उसके मुंबई में होने की जानकारी मिली. इसके बाद मदन महल पुलिस की टीम ने अंधेरी वेस्ट में कार्रवाई कर उसे गिरफ्तार कर लिया.
सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ फोटो
पुलिस जांच में आरोपित के सोशल मीडिया व्यवहार को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है. बताया गया है कि बृजेश सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ अपनी तस्वीरें पोस्ट करता था. लग्जरी कार में पिस्टल के साथ उसकी तस्वीर भी सामने आई है. इन तस्वीरों के जरिए वह अपना प्रभाव और दबदबा दिखाने की कोशिश करता था.
पुलिस को आशंका है कि सोशल मीडिया पर हथियारों और प्रभावशाली लोगों से संपर्क की तस्वीरें दिखाना भी उसके ठगी के तरीके का हिस्सा रहा होगा. इससे सामने वाले व्यक्ति पर प्रभाव पड़ता था और उसे यह विश्वास होने लगता था कि आरोपित वास्तव में बड़े अधिकारियों या प्रभावशाली लोगों तक पहुंच रखता है.
हालांकि पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि सोशल मीडिया पर दिखाई गई हथियारों की तस्वीरों में इस्तेमाल किए गए हथियार वास्तविक थे या किसी अन्य उद्देश्य से प्रदर्शित किए गए थे. इस संबंध में जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी.
प्रयागराज में 3500 करोड़ के ऋण का मामला
पुलिस की जांच में बृजेश के प्रयागराज कनेक्शन की जानकारी भी सामने आई है. आरोप है कि उसने प्रयागराज के एक शिक्षण संस्थान के संचालक को भी बड़े ऋण का झांसा दिया था. संस्थान को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाने और इसके लिए करीब 3500 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराने का दावा किए जाने की बात सामने आई है.
इस मामले में आरोपित ने कथित तौर पर करीब 71.50 लाख रुपये हासिल किए. इतनी बड़ी रकम लेने के बाद भी ऋण उपलब्ध नहीं कराया गया. पुलिस अब इस मामले से जुड़े दस्तावेजों और लेनदेन की जानकारी जुटाने में लगी है. जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस मामले में बृजेश अकेला सक्रिय था या उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति अथवा गिरोह भी जुड़ा हुआ था.
बंगाल तक फैले होने की आशंका
जबलपुर पुलिस की प्रारंभिक जांच में उत्तर प्रदेश के अलावा बंगाल में भी इसी तरह लोगों को निशाना बनाए जाने की जानकारी मिली है. पुलिस का मानना है कि आरोपित ने अलग-अलग शहरों में अपनी पहचान और संपर्कों का इस्तेमाल कर लोगों को बड़े ऋण का भरोसा दिया हो सकता है.
जांच अधिकारियों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बृजेश ने कितने लोगों से रकम ली और अलग-अलग मामलों में कुल कितनी राशि की ठगी की गई. पुलिस पुराने रिकॉर्ड खंगालने के साथ-साथ दूसरे राज्यों की पुलिस से भी संपर्क कर रही है. इससे यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उसके खिलाफ पहले से कोई शिकायत, प्रकरण या जांच तो लंबित नहीं है.
बड़े ऋण का लालच बना ठगी का आधार
पुलिस की अब तक की जांच में सामने आया तरीका यह है कि बृजेश ऐसे लोगों को निशाना बनाता था जिन्हें कारोबार, शिक्षण संस्थान या अन्य कामों के लिए बड़ी रकम की जरूरत होती थी. वह कम ब्याज और बिना गारंटी करोड़ों रुपये का ऋण दिलाने का भरोसा देता था. बड़े ऋण का प्रस्ताव सामने आने के बाद वह प्रक्रिया से जुड़े खर्च के नाम पर रकम मांगता था.
ऐसे मामलों में शुरुआती तौर पर अपेक्षाकृत कम रकम लेने के बाद धीरे-धीरे भुगतान बढ़ाने का दबाव बनाया जाता था. प्रोसेसिंग फीस, स्टाम्प ड्यूटी और अन्य औपचारिकताओं का हवाला देकर रकम मांगी जाती थी. जब पीड़ित को संदेह होता या वह पैसा वापस मांगता, तो आरोप है कि बृजेश अपनी कथित ऊंची पहुंच का हवाला देकर दबाव बनाने लगता था.
पुराने मामलों की भी होगी पड़ताल
पुलिस अब आरोपित के पुराने रिकॉर्ड की जांच कर रही है. उसके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया गतिविधियों, बैंक खातों और संपर्कों से जुड़े तथ्यों की जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ठगी का नेटवर्क किस स्तर तक फैला हुआ था.
जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पीड़ितों से ली गई रकम किन खातों में पहुंची और क्या वह रकम किसी अन्य व्यक्ति तक भी भेजी गई. यदि दूसरे लोगों की भूमिका सामने आती है तो पुलिस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपितों तक भी पहुंच सकती है.
पुलिस का कहना है कि फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में बृजेश के जाल में फंसे अन्य लोगों के सामने आने की संभावना है. पुलिस दूसरे राज्यों में दर्ज शिकायतों और मामलों की जानकारी भी जुटा रही है. इसके आधार पर ठगी की वास्तविक रकम और पीड़ितों की संख्या का आकलन किया जाएगा.
पुलिस की जांच में खुलेंगे ठगी के और राज
बृजेश तिवारी की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस उसके कथित ठगी के पूरे तरीके और संपर्कों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है. जबलपुर में 15 करोड़ रुपये का ऋण दिलाने के नाम पर नौ लाख रुपये लेने और प्रयागराज में 3500 करोड़ रुपये के ऋण का झांसा देकर 71.50 लाख रुपये लेने के आरोपों ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है.
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इन मामलों में एक जैसा तरीका अपनाया गया था और क्या अन्य शहरों में भी इसी तरह के पीड़ित मौजूद हैं. जांच आगे बढ़ने के साथ आरोपित के पुराने रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, सोशल मीडिया संपर्क और दूसरे राज्यों से जुड़े मामलों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी. फिलहाल पुलिस की कार्रवाई का केंद्र बृजेश के कथित नेटवर्क तक पहुंचना और उससे जुड़े अन्य मामलों की जानकारी जुटाना है.

