नई दिल्ली। अमिताभ बच्चन की नातिन और एंटरप्रेन्योर नव्या नवेली नंदा अब स्टार्टअप और निवेश की दुनिया में भी अपनी भूमिका बढ़ा रही हैं। उन्होंने अपने परिवार के फैमिली ऑफिस की वेंचर आर्म नवेली वेंचर्स को औपचारिक रूप से लॉन्च किया है। इस प्लेटफॉर्म का फोकस उन तकनीकी और रिसर्च आधारित क्षेत्रों पर रहेगा, जहां किसी कारोबार को खड़ा करने में सामान्य स्टार्टअप की तुलना में ज्यादा समय, पूंजी और तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत होती है।
नवेली वेंचर्स के जरिए डीपटेक, स्पेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन एनर्जी, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और हेल्थ जैसे क्षेत्रों में निवेश के अवसर तलाशे जाएंगे। कंपनी का दायरा केवल सीधे स्टार्टअप निवेश तक सीमित नहीं रहेगा। संस्थागत फंड, को-इन्वेस्टमेंट और अकादमिक एवं इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी साझेदारियों के जरिए भी निवेश के अवसर तलाशने की योजना है।
मार्च 2023 में बनी थी नवेली वेंचर्स
नवेली वेंचर्स LLP को मार्च 2023 में शामिल किया गया था। इसमें नव्या नवेली नंदा और अगस्त्य नंदा डेजिग्नेटेड पार्टनर हैं। कंपनी का गठन पहले हो चुका था, लेकिन अक्टूबर 2026 में इसकी निवेश रणनीति को औपचारिक तौर पर सामने लाया गया है।
नव्या ने लिंक्डइन पर साझा जानकारी में बताया कि नवेली वेंचर्स सीधे स्टार्टअप निवेश के साथ-साथ संस्थागत फंड, सह-निवेश और अकादमिक व इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी साझेदारियों के जरिए काम करेगा।
यह पहल नंदा परिवार के फैमिली ऑफिस से जुड़ी है। परिवार का कारोबारी संबंध एस्कॉर्ट्स कुबोटा जैसे कारोबार से भी रहा है। ऐसे में नवेली वेंचर्स को परिवार की निवेश क्षमता को नई तकनीक और रिसर्च आधारित कंपनियों तक ले जाने वाली पहल के तौर पर देखा जा सकता है।
फोकस सिर्फ डिजिटल स्टार्टअप तक सीमित नहीं
भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम लंबे समय तक इंटरनेट, ई-कॉमर्स, फिनटेक और कंज्यूमर टेक जैसी कंपनियों के इर्द-गिर्द ज्यादा सक्रिय रहा है। अब निवेशकों की दिलचस्पी ऐसे कारोबारों में भी बढ़ रही है, जिनमें तकनीक विकसित करने और बाजार तक पहुंचने में लंबा समय लग सकता है।
डीपटेक इसी श्रेणी का क्षेत्र है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, स्पेस टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड मटेरियल, बायोटेक्नोलॉजी और दूसरी जटिल तकनीकों पर काम करने वाली कंपनियां शामिल हो सकती हैं।
नवेली वेंचर्स का सेक्टर फोकस इसी बदलाव की ओर इशारा करता है। खासतौर पर स्पेस और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग ऐसे क्षेत्र हैं, जहां शुरुआती स्तर पर बड़ी पूंजी की जरूरत हो सकती है और किसी तकनीक को व्यावसायिक स्तर तक पहुंचाने में लंबा समय लग सकता है।
डीपटेक को सरकारी स्तर पर भी मिल रहा बढ़ावा
नवेली वेंचर्स का औपचारिक लॉन्च ऐसे समय हुआ है, जब भारत में रिसर्च, इनोवेशन और डीपटेक कंपनियों के लिए सरकारी तथा निजी निवेश बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
दिए गए विवरण के मुताबिक, सरकार की रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन स्कीम के तहत छह साल में एक लाख करोड़ रुपये का फंड बनाने की योजना है। इसके अलावा स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 में 10 हजार करोड़ रुपये का फंड रखा गया है। इसमें डीपटेक और टेक्नोलॉजी आधारित मैन्युफैक्चरिंग पर भी फोकस किया जाना है।
इससे यह संकेत मिलता है कि भारत में स्टार्टअप निवेश का दायरा अब केवल तेजी से बढ़ने वाले डिजिटल कारोबारों तक सीमित नहीं है। रिसर्च आधारित तकनीकों को भी भविष्य के कारोबारी अवसरों के रूप में देखा जा रहा है।
निजी निवेशकों की नजर भी डीपटेक पर
डीपटेक सेक्टर में निजी निवेशकों की सक्रियता भी बढ़ी है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, Capital-A ने मैन्युफैक्चरिंग और डीपटेक स्टार्टअप्स के लिए 160 करोड़ रुपये के दूसरे फंड का पहला चरण पूरा किया है।
वहीं Bluehill.VC ने फ्रंटियर-टेक के लिए 400 करोड़ रुपये का फंड बंद किया है। इसके अलावा आईआईटी मद्रास, आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क और यूनिकॉर्न इंडिया वेंचर्स ने IITM Unicorn Frontier Fund-I के लिए 450 करोड़ रुपये का पहला चरण पूरा करने की घोषणा की है। इस फंड का कुल लक्ष्य एक हजार करोड़ रुपये है और इसका फोकस डीपटेक पर है।
ऐसे माहौल में नवेली वेंचर्स की एंट्री को डीपटेक और भविष्य की तकनीकों में बढ़ती निजी पूंजी की दिलचस्पी के संदर्भ में देखा जा सकता है।
नव्या के लिए कारोबारी भूमिका का नया विस्तार
नव्या नवेली नंदा पहले भी उद्यमिता और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय रही हैं। अब नवेली वेंचर्स के जरिए उनकी भूमिका निवेश और स्टार्टअप इकोसिस्टम के एक अलग और तकनीक-केंद्रित हिस्से तक पहुंच रही है।
हालांकि किसी भी वेंचर फर्म की सफलता केवल उसके चुने हुए सेक्टरों से तय नहीं होती। असली चुनौती यह होगी कि वह किन कंपनियों का चयन करती है, शुरुआती तकनीकी जोखिम को किस तरह समझती है और लंबे समय में इन निवेशों को किस तरह आगे बढ़ाती है।
डीपटेक और स्पेस जैसे क्षेत्रों में निवेश का रिटर्न भी सामान्य स्टार्टअप से अलग हो सकता है। यहां तकनीक का विकास, परीक्षण, नियामकीय मंजूरी और बाजार तक पहुंचने की प्रक्रिया लंबी हो सकती है। इसलिए नवेली वेंचर्स के लिए लंबी अवधि की निवेश रणनीति महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल कंपनी ने जिन क्षेत्रों को अपना प्राथमिक फोकस बनाया है, उनमें भारत के भविष्य के टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम के कई अहम हिस्से शामिल हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि नवेली वेंचर्स किन स्टार्टअप्स और रिसर्च आधारित परियोजनाओं में पूंजी लगाता है और डीपटेक बाजार में उसकी भूमिका आगे कितनी बड़ी बनती है।

