*बखरी के नदैल घाट में फिर उजागर हुआ देह व्यापार का सच, महापंचायत का संकल्प भी टूटा*- *प्रशासन की कार्रवाई भी बेअसर*
*बखरी (बेगूसराय)।*
तमाम फरमान और छापेमारी के बाद भी बखरी का नदैल घाट जिस्मफरोसी के दलदल से बाहर नहीं निकल पा रहा है। रविवार 27 सितंबर कि रात 16 साल की किशोरी का चकलाघर से भागकर बाजार में मिलना, इस नर्क की सच्चाई को फिर उजागर कर गया।
बाहर से झोपड़ियों और किराये के कमरों की बस्ती दिखने वाला बखरी का नदैल घाट, अंदर से आज भी उसी नर्क में जी रहा है।
उक्त चकलाघर से भागी नाबालिक इस उदाहरण का पुख्ता सबूत है कि तमाम फरमान और पुलिस कार्रवाई के बाद भी हालात जस के तस हैं।
*सामाजिक पहल भी बेअसर*
दिसंबर 2025 में सामाजिक स्तर पर बड़ा कदम उठाया गया था। एक दर्जन गांवों के लोगों ने महापंचायत कर इस अनैतिक धंधे को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया था। तय हुआ था कि नहीं मानने पर जुर्माना, सामाजिक बहिष्कार और कानूनी कार्रवाई होगी। इसके लिए कमेटी भी बनाई गई। लेकिन चोरी-छिपे यह धंधा अंदर ही अंदर चलता रहा।
*बाहर की बेटियां, मजबूरी का जाल*
पुलिस रेस्क्यू और स्थानीय लोगों की मानें तो यहां की अधिकतर लड़कियां स्थानीय नहीं हैं। झारखंड, बंगाल, नेपाल, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, पटना से नौकरी और शादी का झांसा देकर लाया जाता है। पिछले एक साल में इस नरकीय दलदल से बचने के लिए कई नाबालिग छत से कूदकर इधर उधर के रास्ते पब्लिक के सहयोग से जीवन सुरक्षित करने के लिए पुलिस के सारण में गये और अपनी नरकीय जीवन को सुरक्षित किये।
स्थानीय लोगों के अनुसार शाम ढलते ही नदैल चौक एवं अंदरूनी कमरों में संदिग्ध गतिविधि बढ़ जाती है।
*सिर्फ देह व्यापार नहीं, नशे का अड्डा भी*
ग्रामीणों का कहना है कि यह इलाका अब सिर्फ देह व्यापार का नहीं, नशा और अपराध का अड्डा बनता जा रहा है। हाल ही में नदैल चौक से नशे की हालत में कई युवक पकड़े गए थे, उनकी कार से शराब की बोतलें भी बरामद हुई थीं।
*निष्कर्ष -*
यह सिर्फ पुलिस का विषय नहीं, सामाजिक सवाल है। जब तक पीड़ित महिलाओं के पुनर्वास, बच्चों की शिक्षा और पहचान के संकट पर ठोस काम नहीं होगा, और तस्करों पर स्थायी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक नदैल घाट की ये बदनाम गलियां आबाद रहेंगी।

