लेखक: देवानंद सिंह
भारत और बेल्जियम के बीच संबंधों में बीते एक दशक के दौरान जिस तरह विस्तार हुआ है, वह अब एक नए और अधिक महत्वाकांक्षी दौर में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बेल्जियम यात्रा के दौरान हुई उच्चस्तरीय बातचीत ने यह संकेत दिया है कि दोनों देश अपने पारंपरिक आर्थिक और कारोबारी रिश्तों को अब रक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, शिक्षा, अनुसंधान और तकनीक जैसे रणनीतिक क्षेत्रों तक विस्तार देना चाहते हैं।
भारत और बेल्जियम: रणनीतिक साझेदारी का नया दौर
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत और बेल्जियम ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और संभावनाओं का संकेत है। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इसे आर्थिक संबंधों के लिए नए अवसरों का द्वार बताया है।
बेल्जियम की कंपनियों के लिए भारत में निवेश को आसान बनाने के उद्देश्य से फास्ट-ट्रैक तंत्र और भारत-बेल्जियम व्यापार मंच को नियमित संस्थागत स्वरूप देने का निर्णय भी महत्वपूर्ण है। यदि इन व्यवस्थाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो निवेश, तकनीकी सहयोग और कारोबारी साझेदारी को नई गति मिल सकती है। अधिक जानकारी के लिए भारत का विदेश मंत्रालय देखें।
रक्षा सहयोग में बढ़ती नजदीकी
भारत और बेल्जियम के संबंधों का एक अहम पहलू रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग भी बनता जा रहा है। दोनों देशों ने सैन्य आदान-प्रदान और प्रशिक्षण सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। रक्षा उद्योगों के बीच हुए समझौते सह-विकास और सह-उत्पादन के नए अवसर पैदा कर सकते हैं।
यह पहल भारत की उस व्यापक रणनीति के अनुरूप भी है, जिसमें रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के साथ-साथ विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ अत्याधुनिक तकनीक और उत्पादन क्षमता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
स्वच्छ ऊर्जा से सेमीकंडक्टर तक साझेदारी
बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता निर्णायक भूमिका निभा रही है। ऐसे समय में नवीकरणीय ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण में सहयोग दोनों देशों के लिए दूरगामी महत्व रखता है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बेल्जियम की विशेषज्ञता और भारत के विशाल बाजार तथा बढ़ते तकनीकी इकोसिस्टम का मेल भविष्य में उल्लेखनीय परिणाम दे सकता है। दोनों देशों द्वारा बेल्जियम के आईएमईसी संस्थान को भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम से जोड़ने की दिशा में सहयोग का निर्णय इसी संभावना को मजबूत करता है।
ज्ञान और प्रतिभा की साझेदारी भी जरूरी
किसी भी आधुनिक साझेदारी की सफलता केवल व्यापार और निवेश से तय नहीं होती। विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और युवाओं के बीच संपर्क भी उतना ही महत्वपूर्ण है। भारत और बेल्जियम ने विश्वविद्यालय एवं अनुसंधान सहयोग मजबूत करने तथा प्रतिभाओं के आवागमन के लिए प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति जताई है।
यह कदम दोनों देशों के बीच ज्ञान, नवाचार और तकनीकी क्षमता के आदान-प्रदान को मजबूत कर सकता है।
वैश्विक संकटों पर साझा दृष्टिकोण
भारत-बेल्जियम वार्ता का महत्व केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है। यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों तथा आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों की साझा चिंता यह दर्शाती है कि भारत और यूरोप के बीच रणनीतिक संवाद का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
भारत का यह स्पष्ट रुख कि आतंकवाद के हर रूप को जड़ से समाप्त करने के लिए वैश्विक सहयोग आवश्यक है, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के बदलते परिदृश्य में महत्वपूर्ण है। वहीं, संवाद और कूटनीति के माध्यम से संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर भारत की संतुलित विदेश नीति को भी रेखांकित करता है।
हीरा कारोबार से आधुनिक रणनीतिक साझेदारी तक
भारत और बेल्जियम के रिश्तों में हीरा कारोबार की ऐतिहासिक भूमिका रही है। लेकिन अब इन संबंधों का स्वरूप कहीं अधिक व्यापक हो चुका है। व्यापार से लेकर रक्षा, ऊर्जा से लेकर तकनीक और शिक्षा से लेकर वैश्विक कूटनीति तक दोनों देशों के हित कई क्षेत्रों में एक-दूसरे से जुड़ रहे हैं।
वास्तविक चुनौती अब घोषणाओं को परिणाम में बदलने की है। अगले पांच वर्षों में व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य तभी सफल होगा, जब निवेश की बाधाएं कम हों, नियामकीय प्रक्रियाएं सरल हों, उद्योगों के बीच सीधा संवाद बढ़े और नई तकनीकों में ठोस संयुक्त परियोजनाएं धरातल पर उतरें।
भारत और बेल्जियम के बीच बन रही यह नई साझेदारी बताती है कि 21वीं सदी की कूटनीति केवल राजनीतिक रिश्तों तक सीमित नहीं है। यह व्यापार, तकनीक, सुरक्षा, ऊर्जा, ज्ञान और मानव संसाधन—इन सभी को जोड़कर व्यापक रणनीतिक सहयोग का रूप ले रही है।
यदि दोनों देश अपनी प्रतिबद्धताओं को समयबद्ध तरीके से लागू करते हैं, तो भारत-बेल्जियम संबंध न केवल दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी होंगे, बल्कि भारत और यूरोप के बीच एक मजबूत, भरोसेमंद और भविष्य उन्मुख साझेदारी के महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में भी उभर सकते हैं।

