Author: Devanand Singh

लेखक: इंद्र यादवमुंबई। मुहर्रम के मद्देनज़र सुरक्षा व्यवस्था के बीच **मुंबई पुलिस संदिग्ध कैप्सूल** मामले में एक व्यक्ति को बड़ी संख्या में संदिग्ध कैप्सूल के साथ गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान **फैयाज प्रेमजी** के रूप में हुई है और उसके पास से **14,900 कैप्सूल** बरामद किए गए हैं। इस गिरफ्तारी ने मुहर्रम से पहले सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता को दर्शाया है और एक संभावित खतरे को टाल दिया है। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में इन कैप्सूल में **चूहे मारने वाले जहरीले पदार्थ** की मौजूदगी का संदेह है, जिससे इनकी गंभीरता और बढ़…

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लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाताभोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड के बिलौटी गांव में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत भूषण तिवारी के मामले को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय शनिवार को बिलौटी गांव पहुंचे।उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, अजय राय ने भरत भूषण तिवारी के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और अपनी गहरी शोक संवेदना व्यक्त की। इस दौरान उन्होंने परिजनों का हालचाल जाना तथा घटना को लेकर उनकी बातें भी सुनीं।भरत भूषण तिवारी मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं…

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लेखक: इंद्र यादवमुंबई/इंद्र यादव/आजकल कहा जाता है कि कलम में बहुत ताकत होती है। लेकिन सच तो यह है कि अब यह कलम अक्सर ‘विज्ञापन’ और ‘पैसे’ के दबाव में दब कर रह गई है, जिससे पत्रकारिता की खामोशी बढ़ती जा रही है।हम रोज सुबह अखबार पढ़ते हैं या टीवी देखते हैं, यह उम्मीद लेकर कि हमें सच पता चलेगा। अखबार और न्यूज़ चैनल खुद को ‘समाज का आईना’ और ‘लोकतंत्र का चौथा स्तंभ’ बताते हैं। सुनने में यह सब बहुत अच्छा लगता है, लेकिन असलियत थोड़ी अलग है। आज का यह ‘आईना’ इतना ज्यादा धुंधला हो चुका है कि…

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लेखक: डाक्टर दीपक गोस्वामी मंदिर भारत में सिर्फ पूजा स्थल नहीं रहे। ये राजकोष थे, बैंक थे, समाज की तिजोरी थे। राजा से लेकर किसान तक सोना, चांदी, जमीन मंदिर को दान करता था। यही वजह है कि जब भी कोई आक्रांता आया, लुटेरा आया या लालची हाथ बढ़ा, निशाना मंदिर का चढ़ावा ही बना। इस ऐतिहासिक और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में, धर्मस्थलों के चढ़ावे पर डाका कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह एक सदियों पुरानी समस्या है। प्राचीन काल से धन का लक्ष्य आठवीं सदी में मुहम्मद बिन कासिम सिंध आया। देबल और नीरून के मंदिरों से मूर्तियां तोड़ीं,…

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लेखक: ललित गर्गभारतीय संत परंपरा में यदि किसी एक संत ने धर्म, समाज, अध्यात्म और मानवीय चेतना को सबसे अधिक झकझोरा, तो वह नाम है-संत कबीर। वे केवल एक कवि, संत या समाज-सुधारक नहीं थे, बल्कि भारतीय आत्मा की उस जागृत चेतना के प्रतीक थे, जिसने मनुष्य को मनुष्य के रूप में देखने की दृष्टि दी। कबीर भारतीय अध्यात्म के ऐसे महासूर्य हैं, जिनकी वाणी आज भी उतनी ही प्रासंगिक, प्रेरक और क्रांतिकारी है, जितनी छह सौ वर्ष पूर्व थी।आज जब संसार हिंसा, युद्ध, आतंकवाद, धार्मिक कट्टरता, सामाजिक विभाजन, उपभोक्तावाद, मानसिक तनाव और नैतिक पतन जैसी चुनौतियों से जूझ रहा…

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अयोध्या का राम मंदिर: आस्था का प्रतीक और पारदर्शिता की पुकारअयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर बन रहा भव्य मंदिर केवल एक धार्मिक संरचना मात्र नहीं है, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों की गहरी आस्था, अटूट विश्वास और दशकों लंबे सामाजिक-राजनीतिक संघर्ष का एक जीवंत प्रतीक है। ऐसे में, जब इस पवित्र परियोजना से जुड़े वित्तीय लेन-देन, चंदे के उपयोग या निर्माण संबंधी किसी भी विवाद, जांच, एफआईआर या कानूनी कार्रवाई की खबर सामने आती है, तो यह केवल एक कानूनी मुद्दा बनकर नहीं रह जाता। यह सीधे उन अनगिनत श्रद्धालुओं के हृदय से जुड़ जाता है, जिन्होंने अपनी श्रद्धा, समर्पण और…

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नई दिल्ली: भारत में शहरीकरण की रफ्तार अब इतनी तेज हो चुकी है कि प्रशासनिक सीमाएं भी उसके सामने छोटी पड़ने लगी हैं। देश के अनगिनत क्षेत्र ऐसे हैं, जो सरकारी कागजों पर भले ही आज भी गांव दर्ज हों, लेकिन हकीकत में वे पूरी तरह से आधुनिक शहरों में तब्दील हो चुके हैं। इन इलाकों में खेती-किसानी पर निर्भरता कम हो गई है, गगनचुंबी इमारतें खड़ी हो रही हैं और सड़कों का जाल बिछ गया है। इस अभूतपूर्व बदलाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने अब एक महत्वपूर्ण कदम उठाने का मन बनाया है। वह शहरी और ग्रामीण के…

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कराकस, वेनेजुएला: लैटिन अमेरिकी देश वेनेजुएला में हाल ही में आए भीषण वेनेजुएला भूकंप ने पूरे देश में व्यापक पैमाने पर तबाही मचा दी है। स्थानीय समयानुसार शाम करीब 6 बजे एक मिनट से भी कम अंतराल में आए दो शक्तिशाली भूकंपों ने कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, बड़ी संख्या में मकान और इमारतें ढह गई हैं, जबकि अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के प्रारंभिक आकलन में भारी जनहानि की आशंका जताई गई है। हालांकि, वेनेजुएला सरकार ने अभी तक मृतकों और घायलों का कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है,…

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लेखक: इंद्र यादवमुजफ्फरनगर की यह हृदय विदारक घटना इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि आज भी **गुलामी जिंदा है**। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में जो हुआ, उसे पढ़कर कलेजा मुंह को आ जाता है। **13 मजदूर**, जो अपनी रोजी-रोटी के लिए निकले थे, उन्हें **डेढ़ साल** तक एक ऐसी फैक्ट्री में बंधक बनाकर रखा गया, जो फैक्ट्री कम, यमराज का अड्डा ज्यादा लग रही थी। शरीर पे पेचकस से छेद, हड्डियों का ढांचा और पेट में भूख की आग—ये कोई फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि हमारे समाज के पिछवाड़े में चल रहा नंगा सच है।शिक्षा का अभाव: साज़िश या…

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लेखक: अजय कुमार भारत में नागरिकता को लेकर चल रही हालिया बहस ने एक ऐसी गहरी कानूनी और सामाजिक पहेली को जन्म दिया है, जिसे सुलझाना अब आम नागरिक के लिए अनिवार्य हो गया है। हाल ही में विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट सेवा दिवस पर जो स्पष्टीकरण दिया, उसने देश भर के मध्यम वर्ग में खलबली मचा दी है। मंत्रालय ने दो टूक शब्दों में कहा कि पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है, नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं। सुनने में यह तकनीकी लगता है, लेकिन इसकी गहराई में उतरने पर पता चलता है कि हमारी पहचान को लेकर जो सुरक्षा…

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