कोलकाता भगदड़: मुख्यमंत्री ने पांच पीड़ित परिवारों को अनुग्रह राशि सौंपी, विपक्ष पर निशाना साधा
कोलकाता, 20 अक्टूबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा कर कोलकाता भगदड़ में मारे गए पांच लोगों के परिजन से मुलाकात की और प्रत्येक परिवार को 25 लाख रुपये की अनुग्रह राशि सौंपी। उन्होंने इस घटना के बाद विपक्ष की “अनुपस्थिति” को लेकर उसकी आलोचना भी की।
शुभेंदु ने दावा किया कि भगदड़ को लेकर बांग्लादेश से सोशल मीडिया पर “फर्जी विमर्श” प्रसारित किए जा रहे हैं। उन्होंने ऐसी सामग्री प्रसारित करने या उसका समर्थन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
उत्तर कोलकाता में शनिवार शाम दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई थी और 25 अन्य घायल हो गए थे।
शुभेंदु ने विपक्षी नेताओं के घटनास्थल या अस्पतालों में नहीं पहुंचने पर सवाल उठाते हुए पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पूर्ववर्ती ममता बनर्जी के शासनकाल में लोगों की मौत के बावजूद उत्सव जारी रहे।
शुभेंदु ने कहा, “लोग पिछली सरकार और हमारी सरकार के बीच स्पष्ट अंतर देख सकते हैं। वर्ष 2025 में कोलकाता में बिजली का झटका लगने से 13 लोगों की मौत हुई थी, जबकि दार्जिलिंग के नागराकाटा में अचानक आई बाढ़ में कई लोगों की जान चली गई थी। इसके बावजूद पूजा समारोह, डांडिया कार्यक्रम और कार्निवल आयोजित किए गए थे।”
मुख्यमंत्री ने सबसे पहले पूर्व बर्धमान जिले में टोगोर बेज (37) और उनके बेटे संदीप बेज (14) के परिवार से मुलाकात की। इसके बाद वह हुगली जिले के आरामबाग में पियाली प्रमाणिक (25) के परिजन से मिले। पियाली, टोगोर बेज की रिश्तेदार थीं।
शुभेंदु ने नदिया जिले के चकदहा में आरती सरकार (45), हुगली के बैद्यबाटी में श्रीपर्णा पोद्दार (26) और हावड़ा के लिलुआ में आकृति राउत (17) के परिजन से भी मुलाकात की।
टोगोर और संदीप बेज के घर पर परिवार के सदस्यों को सांत्वना देते हुए अधिकारी ने कहा, “मेरे पास आपको सांत्वना देने के लिए शब्द नहीं हैं और न ही उन लोगों को वापस लाने की शक्ति है, जो हमें छोड़कर चले गए हैं। मैं आपका दर्द महसूस कर सकता हूं। मैं आपको 25 लाख रुपये की अनुग्रह राशि सौंप रहा हूं।”
पियाली प्रमाणिक के परिजन को सांत्वना देते हुए शुभेंदु ने हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, “पिछली सरकार के विपरीत, हम शब्दों में नहीं, बल्कि काम करने में विश्वास रखते हैं।”
मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से बातचीत में अपने कार्यकाल के दौरान ऐसी घटनाओं से निपटने के तरीके को लेकर पिछली तृणमूल सरकार की आलोचना की।
उन्होंने कहा, “पहले ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को जांच के आदेश दिलाने के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय का रुख करना पड़ता था। क्या आपने कभी किसी सरकार को 25 लाख रुपये का मुआवजा देते सुना है?”
शुभेंदु ने कोलकाता भगदड़ में घायल लोगों को सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने के सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि ऐसा उन्हें सर्वोत्तम संभव उपचार मुहैया कराने और आगे किसी की जान जाने से रोकने के लिए किया गया।
शुभेंदु ने मंगलवार शाम स्वास्थ्य भवन में स्वास्थ्य विभाग के नियंत्रण कक्ष का दौरा करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध उपचार सुविधाओं का आकलन करने के बाद अधिकारियों ने मौके पर ही यह फैसला किया।
उन्होंने कहा, ”हमने घायलों को निजी अस्पतालों में स्थानांतरित किया, क्योंकि हमें लगा कि वहां उन्हें बेहतर उपचार दिया जा सकता है, ताकि आगे किसी की जान न जाए। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि भगदड़ में घायल हुए 25 लोगों में से किसी की भी मौत नहीं हुई।”
घायलों को स्थानांतरित किए जाने के फैसले की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए शुभेंदु ने कहा कि इसे राज्य के स्वास्थ्य विभाग की विफलता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ”घायलों को स्थानांतरित किए जाने के कारण लोग स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव की आलोचना कर रहे हैं। लेकिन मैं कहना चाहूंगा कि इससे यह साबित नहीं होता कि राज्य का स्वास्थ्य ढांचा विफल हो गया है।”

