Author: Devanand Singh

लेखक: देवानंद सिंहझारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर उठा विवाद अब केवल एक भर्ती परीक्षा का मामला नहीं रह गया है। यह युवाओं के भरोसे, सरकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता और राजनीतिक जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है। जब हजारों अभ्यर्थी वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा देते हैं, तब परिणामों पर उठने वाला हर सवाल केवल अंक या कट-ऑफ का नहीं, बल्कि उनके भविष्य और व्यवस्था में विश्वास का होता है।जेपीएससी पर उठते सवालछात्रों ने परिणाम घोषित होने के बाद कट-ऑफ सार्वजनिक नहीं किए जाने, मेरिट सूची की प्रक्रिया और सोशल मीडिया…

Read More

लेखक: राष्ट्र संवाद डेस्कभारतीय सभ्यता की पहचान केवल उसके ग्रंथों में ही नहीं, बल्कि उसकी मिट्टी, स्मारकों, पुरास्थलों और सांस्कृतिक स्मृतियों में भी सुरक्षित है। जब कोई शोधकर्ता वर्षों तक किसी विषय पर गहन अध्ययन, मैदानी सर्वेक्षण और उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों का निष्पक्ष विश्लेषण करता है, तब उसका कार्य केवल एक पुस्तक नहीं रह जाता, बल्कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का दस्तावेज़ बन जाता है।धर्मक्षेत्र का दस्तावेज़: एक शोधपरक दृष्टिइसी कड़ी में लेखिका मनीषा शर्मा की शोध-आधारित पुस्तक “धर्मक्षेत्र का दस्तावेज़: इतिहास और पुरातत्व पर एक प्रकाश” एक महत्वपूर्ण साहित्यिक और ऐतिहासिक प्रयास के रूप में सामने…

Read More

लेखक: ललित गर्गपाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में इन दिनों जो परिस्थितियां निर्मित हो रही हैं, वे केवल एक चुनावी प्रक्रिया की कहानी नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र, मानवाधिकार और जनविश्वास के गहरे संकट की दास्तान हैं। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक शक्ति निष्पक्ष चुनाव, नागरिक स्वतंत्रता और शासन की जवाबदेही में निहित होती है, लेकिन जब चुनाव भय, हिंसा, प्रशासनिक दबाव और धांधली के आरोपों से घिर जाएँ, तब लोकतंत्र का स्वरूप विकृत हो जाता है। आज पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की स्थिति इसी कठोर वास्तविकता की ओर संकेत करती है। वहाँ के लोगों का आक्रोश केवल चुनावी अनियमितताओं तक सीमित…

Read More

लेखक: राष्ट्र संवाद डेस्कनई दिल्ली: धर्मक्षेत्र का दस्तावेज़: इतिहास और पुरातत्व पर एक प्रकाश नामक नई शोध-आधारित पुस्तक भारतीय इतिहास और पुरातत्व के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान है।धर्मक्षेत्र का दस्तावेज़: इतिहास और पुरातत्व पर एक प्रकाश: प्रमुख बिंदुभारतीय सभ्यता की पहचान केवल उसके ग्रंथों में ही नहीं, बल्कि उसकी मिट्टी, स्मारकों, पुरास्थलों और सांस्कृतिक स्मृतियों में भी सुरक्षित है। जब कोई शोधकर्ता वर्षों तक किसी विषय पर गहन अध्ययन, मैदानी सर्वेक्षण और उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों का निष्पक्ष विश्लेषण करता है, तब उसका कार्य केवल एक पुस्तक नहीं रह जाता, बल्कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का दस्तावेज़…

Read More

लेखक: ललित गर्गपाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में इन दिनों जो परिस्थितियां निर्मित हो रही हैं, वे केवल एक चुनावी प्रक्रिया की कहानी नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र, मानवाधिकार और जनविश्वास के गहरे संकट की दास्तान हैं। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक शक्ति निष्पक्ष चुनाव, नागरिक स्वतंत्रता और शासन की जवाबदेही में निहित होती है, लेकिन जब चुनाव भय, हिंसा, प्रशासनिक दबाव और धांधली के आरोपों से घिर जाएँ, तब लोकतंत्र का स्वरूप विकृत हो जाता है। आज पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की स्थिति इसी कठोर वास्तविकता की ओर संकेत करती है। वहाँ के लोगों का आक्रोश केवल चुनावी अनियमितताओं तक सीमित…

Read More

लेखक: ललित गर्ग पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में इन दिनों जो परिस्थितियां निर्मित हो रही हैं, वे केवल एक चुनावी प्रक्रिया की कहानी नहीं हैं, बल्कि लोकतंत्र, मानवाधिकार और जनविश्वास के गहरे संकट की दास्तान हैं। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक शक्ति निष्पक्ष चुनाव, नागरिक स्वतंत्रता और शासन की जवाबदेही में निहित होती है, लेकिन जब चुनाव भय, हिंसा, प्रशासनिक दबाव और धांधली के आरोपों से घिर जाएँ, तब लोकतंत्र का स्वरूप विकृत हो जाता है। आज पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की स्थिति इसी कठोर वास्तविकता की ओर संकेत करती है। वहाँ के लोगों का आक्रोश केवल चुनावी अनियमितताओं तक…

Read More

लेखक: इंद्र यादव ठाणे में शुरू हुई ‘मराठी पाठशाळा’: एक अनूठी सामाजिक पहल महाराष्ट्र के ठाणे शहर में रिक्शा और टैक्सी चालकों को मराठी भाषा से जोड़ने के लिए एक अभिनव अभियान ‘मराठी पाठशाळा’ की शुरुआत की गई है। इस पहल का उद्देश्य चालकों को मराठी भाषा में संवाद, सही उच्चारण, लेखन और व्यवहारिक बोलचाल का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्थानीय संस्कृति का अविभाज्य हिस्सा बनाना है। ‘आपली भाषा, आपली ओळख’ यानी अपनी भाषा, अपनी पहचान के नारे के साथ यह कार्यक्रम सामाजिक समरसता और भाषाई गौरव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। ‘मराठी पाठशाळा’ का आयोजन…

Read More

लेखक: इंद्र यादवमराठी पाठशाळा: उद्देश्य और स्वरूपमहाराष्ट्र में मराठी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ठाणे शहर में रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए ‘मराठी पाठशाळा’ की शुरुआत की गई है। ‘आपली भाषा, आपली ओळख’ के नारे के साथ शुरू हुए इस अभियान में चालकों को मराठी भाषा में संवाद, सही उच्चारण, लेखन और व्यवहारिक बोलचाल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।नेतृत्व और मार्गदर्शनइस पहल का आयोजन पूर्व नगरसेवक राजकुमार रामनयन यादव और समाजसेवक महेंद्र सोडारी के नेतृत्व में किया जा रहा है। अभियान को उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक सहित कई जनप्रतिनिधियों का मार्गदर्शन…

Read More

लेखक: देवानंद सिंहलापता महिलाओं और बच्चों की तलाश एक गंभीर सामाजिक चुनौती है जिस पर ओडिशा पुलिस ने उल्लेखनीय कार्य किया है।लापता महिलाओं और बच्चों की तलाशओडिशा पुलिस द्वारा वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में 17,590 लापता महिलाओं और बच्चों का पता लगाकर उन्हें उनके परिवारों से मिलाना निस्संदेह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। इनमें 12,177 महिलाएं और 5,413 बच्चे शामिल हैं। यह आंकड़ा केवल पुलिस की सक्रियता का प्रमाण नहीं, बल्कि यह भी दर्शाता है कि यदि प्रशासन इच्छाशक्ति, तकनीक और समन्वित प्रयासों के साथ काम करे तो हजारों बिछड़े परिवारों में फिर से खुशियां लौटाई जा सकती हैं।हालांकि,…

Read More

लेखक: मृत्युंजय बर्मनमहादेवशाल धाम में श्रावणी मेले का उद्घाटनगोइलकेरा के प्रसिद्ध महादेवशाल धाम में रविवार को श्रावणी मेले का विधिवत एवं भव्य उद्घाटन हुआ। सिंहभूम की सांसद जोबा माझी और मनोहरपुर विधायक जगत माझी ने फीता काटकर मेले का शुभारंभ किया। दोनों जनप्रतिनिधियों ने बाबा भोलेनाथ के दरबार में मत्था टेका और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। उद्घाटन के साथ ही धाम में दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी।मेले में सोमवारी को संभावित भारी भीड़ को देखते हुए महादेवशाल सेवा समिति और प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। बीडीओ सह समिति अध्यक्ष विवेक कुमार और थाना…

Read More