मां रूपी सोरेन की अस्थियां लेकर रजरप्पा पहुंचे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार को एक बेहद निजी और भावुक यात्रा पर निकले। वे अपनी दिवंगत मां रूपी सोरेन की अस्थियां लेकर रामगढ़ जिले के प्रसिद्ध तीर्थस्थल रजरप्पा पहुंचे। यह यात्रा न केवल एक पुत्र का धार्मिक कर्तव्य है, बल्कि सोरेन परिवार की आस्था और परंपराओं का भी प्रतीक है। दामोदर और भैरवी नदियों का पवित्र संगम स्थल उनके परिवार के लिए विशेष महत्व रखता है, जहां वे अपनी मां की आत्मा की शांति के लिए अस्थि विसर्जन की रस्म पूरी करेंगे।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार को अपनी दिवंगत मां रूपी सोरेन की अस्थियां लेकर रामगढ़ जिले के रजरप्पा स्थित दामोदर-भैरवी संगम स्थल पहुंचे। यहां वे धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अपनी मां की अस्थियों का विसर्जन करेंगे।
मुख्यमंत्री अपने पैतृक गांव नेमरा से अस्थियां लेकर रजरप्पा पहुंचे। अस्थि विसर्जन कार्यक्रम को देखते हुए क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पूरे इलाके में पुलिस बल की तैनाती की गई है।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियां
इस संवेदनशील अवसर पर प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम सुनिश्चित किए हैं। रजरप्पा मंदिर परिसर और संगम घाट पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि मुख्यमंत्री और उनके परिवार की निजता बनी रहे तथा धार्मिक क्रियाकलाप बिना किसी बाधा के संपन्न हो सकें। यातायात व्यवस्था को भी सुचारू रखने के लिए अतिरिक्त बल लगाया गया है।
रजरप्पा स्थित दामोदर और भैरवी नदियों का संगम स्थल सोरेन परिवार के लिए विशेष भावनात्मक महत्व रखता है। इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन की अस्थियों का विसर्जन भी इसी घाट पर किया था।
सोरेन परिवार के लिए रजरप्पा का विशेष महत्व
रजरप्पा का यह पवित्र घाट सोरेन परिवार की तीन पीढ़ियों की आस्था का केंद्र रहा है। दिशोम गुरु शिबू सोरेन, जिन्हें झारखंड आंदोलन का जनक माना जाता है, उनकी अस्थियों का विसर्जन भी यहीं किया गया था। यह स्थान परिवार के लिए केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उनकी स्मृतियों और संघर्षों का साक्षी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का यहां बार-बार आना उनकी जड़ों और पारिवारिक परंपराओं के प्रति गहरी श्रद्धा दर्शाता है।
मुख्यमंत्री की मां रूपी सोरेन का निधन होने के बाद परिवार शोक में है। अस्थि विसर्जन की रस्म उनके अंतिम संस्कार से जुड़ी धार्मिक परंपराओं का हिस्सा है।
धार्मिक परंपराएं और पारिवारिक शोक
हिंदू धर्म में अस्थि विसर्जन को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग माना जाता है। रूपी सोरेन के निधन से न केवल परिवार बल्कि पूरे झारखंड में शोक की लहर है। वे एक साधारण गृहिणी होते हुए भी झारखंड मुक्ति मोर्चा के संघर्ष के दिनों में परिवार की मजबूत स्तंभ रहीं। उनका जीवन सादगी और त्याग का उदाहरण रहा। इस दुखद घड़ी में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने तमाम राजकीय दायित्वों के बावजूद पुत्र धर्म निभाने पहुंचे, जो उनके व्यक्तित्व के मानवीय पक्ष को उजागर करता है।
रजरप्पा स्थित छिन्नमस्तिका मंदिर और संगम स्थल की महिमा पुराणों में भी वर्णित है। यहां दामोदर नदी भैरवी नदी से मिलती है, जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां अस्थि विसर्जन करने से दिवंगत आत्मा को सद्गति प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री ने पूरे विधि-विधान के साथ पुरोहितों के मंत्रोच्चार के बीच अपनी मां की अस्थियों को संगम की धारा में प्रवाहित किया। इस दौरान उनके परिवार के अन्य सदस्य और करीबी मित्र भी मौजूद रहे।
इस मार्मिक अवसर पर झारखंड के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति संवेदना व्यक्त की है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा समेत कई गणमान्य व्यक्तियों ने शोक संदेश भेजकर दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की है। यह घटना झारखंड की राजनीति में एक ऐसे नेता की छवि प्रस्तुत करती है जो सत्ता के शिखर पर रहकर भी अपनी माटी, अपनी मां और अपनी परंपराओं से जुड़ा हुआ है।

