“एडीएल सोसाइटी शिक्षा का मंदिर बना सौदेबाज़ी और साजिश का केंद्र”?
जिस छात्र को उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने सम्मानित किया प्रधानाध्यापक प्रभात कुमार ने उसे किया प्रताड़ित
मुख्य संवाददाता राष्ट्र संवाद
एडीएल हाई स्कूल, कदमा में राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी से जुड़ा हालिया मामला झारखंड की शिक्षा व्यवस्था की उस विडंबना को उजागर करता है, जहां छात्रों के भविष्य के साथ कुछ अधिकारी खुलकर खिलवाड़ कर रहे हैं और समिति मुख दर्शक बना है जिस छात्र आसिफ को उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने सम्मानित किया प्रधानाध्यापक प्रभात कुमार ने उसे किया प्रताड़ित

विज्ञान मॉडल के लिए भेजी गई ₹10,000 की शैक्षणिक सहायता में से छात्र को मात्र ₹1,000 देना और शेष राशि वसूल लेना न केवल घोर अनैतिकता है, बल्कि यह पूरी शिक्षा प्रणाली के गले में फंसा हुआ भ्रष्टाचार का फंदा भी है।

लेकिन यह मामला केवल यहीं तक सीमित नहीं है। एडीएल सोसाइटी, कदमा, जहां से यह स्कूल संचालित होता है, वहां कुर्सी की लड़ाई और आंतरिक मारामारी इतनी हावी हो चुकी है कि संस्थान की आत्मा “शिक्षा” कहीं खोती जा रही है। मामला कुर्सी को लेकर उच्च न्यायालय झारखंड तक पहुंची

सोसाइटी के अंदर पदों को लेकर चल रही रस्साकशी और पैरवी की राजनीति ने शिक्षक-अभिभावक-प्रशासन की प्राथमिकताओं को गुम कर दिया है। वहीं दूसरी ओर ऐसे माहौल में भी छात्र अपने प्रयासों से सफलता की नई कहानियाँ लिख रहे हैं जैसे कि आसिफ खान, जिसने 100% अंक प्राप्त किए। लेकिन अफसोस की बात है कि उसकी मार्कशीट तक रोकी गई, केवल इसलिए कि परिवार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई थी।

यह दो बातें एक साथ देखना विचलित करता है एक ओर छात्रों की मेहनत और उपलब्धि, दूसरी ओर सिस्टम की गंदगी और कुर्सी की छीना-झपटी। क्या यही है एडीएल सोसाइटी द्वारा संचालित शिक्षण संस्थान की सच्चाई?जहां कुर्सियों के लिए लड़ते लोग भूल जाते हैं कि दीवारों के भीतर पढ़ने वाले छात्र असल धरोहर हैं?

जिला प्रशासन को चाहिए कि इस पूरे मामले की सिर्फ सतही नहीं, बल्कि गहराई से जांच करे न केवल हेडमास्टर प्रभात कुमार के खिलाफ, बल्कि एडीएल सोसाइटी की कार्यप्रणाली और उसके आंतरिक टकरावों की भी। वरना वो दिन दूर नहीं जब शिक्षा का यह मंदिर पूरी तरह सत्ता, पैसा और पाखंड की भेंट चढ़ जाएगा और छात्र बस व्यवस्था की राख में अपनी प्रतिभा खोजते रह जाएंगे।


