आदित्यपुर प्रशासन की क्षमता पर प्रश्नचिह्न
अपराधियों के हौसले बुलंद, अपराध को रोकने आदित्यपुर पुलिस पूरी तरह है विफल
राष्ट्र संवाद संवाददाता अमन ओझा
सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत सालडीह बस्ती में मंगलवार सुबह अपराधियों ने बेखौफ अंदाज में बड़ी वारदात को अंजाम देकर कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सुबह करीब 6:55 बजे स्कूटी सवार तीन अपराधियों ने भाजपा नेता सपन दास के आवास को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ तीन राउंड फायरिंग की। गनीमत रही कि चली गोलियां खिड़की के लोहे के ग्रिल में जाकर फंस गईं, जिससे घर के अंदर मौजूद परिवार के सदस्य बाल-बाल बच गए और एक बड़ी अनहोनी टल गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। सीसीटीवी फुटेज में पूरी वारदात कैद हो गई है, जिसमें अपराधी फिल्मी अंदाज में आते हैं और बिना किसी डर के फायरिंग शुरू कर देते हैं।

वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर गाली-गलौज करते हुए पैदल ही फरार हो जाते हैं। स्थानीय लोगों ने फुटेज के आधार पर मुख्य आरोपी की पहचान भी कर ली है, लेकिन अब तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह घटना बीते तीन दिनों में दूसरी बड़ी आपराधिक वारदात है। इससे पहले 4 अप्रैल को भी इन्हीं अपराधियों द्वारा इलाके में मारपीट और फायरिंग की कोशिश की गई थी, जहां से पुलिस ने खोखा बरामद किया था। बावजूद इसके अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे लगातार वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर केवल ‘टाइगर मोबाइल’ के जवानों का पहुंचना स्थानीय लोगों के गुस्से को और भड़का गया। लोगों का आरोप है कि पुलिस की गश्ती व्यवस्था और खुफिया तंत्र पूरी तरह फेल हो चुका है। पूर्व पार्षद नील पदम विश्वास ने इसे एक सुनियोजित साजिश बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। लगातार हो रही फायरिंग की घटनाओं ने आदित्यपुर क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। बीते एक महीने में तीन गोलीकांड की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और वे खुलेआम कानून को चुनौती दे रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है। वहीं, आदित्यपुर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन की क्षमता पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।

