राष्ट्र संवाद संवाददाता
पोटका। प्रखंड अंतर्गत हल्दीपोखर में मात्र एक सड़क के कारण करीब दस हजार की आबादी नारकीय जीवन जीने को मजबुर है। यह सड़क दो जिलों के लोगों के लिए लाइफ लाइन माना जाता है। यहां के लोगों ने कई एक बार विभिन्न पार्टियों के राज नेताओं का ध्यान आकृष्ट कराया परन्तु नतीजा कुछ नहीं निकला। यह सड़क हल्दीपोखर बाजार मुख्य पथ से चावल हाट होते हुए रैंकिणी मंदिर, खुर्शीद चौक, जामा मस्जिद, आजाद बस्ती होते हुए हाता चाईबासा मुख्य पथ पर हेसल में मिलता है। इसकी लंबाई 2.1 किलोमीटर है। यह सड़क इसलिए महत्वपूर्ण है कि विशेषकर हल्दीपोखर पश्चिमी पंचायत की पूरी आबादी इसी सड़क पर निर्भर है। सड़क के दोनों ओर दो किलोमीटर क्षेत्र के रहने वाले प्रतिदिन हजारों लोगों का आना जाना प्रातः चार बजे से शुरू हो जाता है। पोटका प्रखंड के दर्जनों पंचायत के लोग जिन्हें राजनगर जाना होता है वे इसी सड़क से आना जाना करते है। हल्दीपोखर बाजार पोटका प्रखंड का मुख्य व्यावसायिक केंद्र है। हल्दीपोखर पश्चिमी के ग्रामीणों का यहां बाजार में कई तरह के दुकान और अन्य व्यवसाय है। विगत सात वर्षों से यहां के लोग सड़क समस्या से जूझ रहे है। वर्तमान में सड़क को देखने से यह पता भी नहीं चलेगा कि सड़क में गड्ढे है या गड्ढे में सड़क है। सड़क इतना जर्जर हो गया है कि
वाहन की बात तो दूर रहे पैदल चलना भी दूभर हो गया है।
अब स्थानीय जन प्रतिनिधियों ने भी मुखर होकर सड़क की मांग को लेकर आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया है। हल्दीपोखर पश्चिमी के पूर्व मुखिया शैयद जबीउल्लाह कहते है कि सड़क की बदहाली को लेकर अब रोना आ रहा है। अब शिकायत किसके पास करे। कई बार जिला पदाधिकारी से लेकर मंत्री तक को लिखा गया। अगर उड़कर जाने की सुविधा रहता तो जाते। झामुमो के वरिष्ठ नेता जिगरूल होदा कहते है कि सड़क की बदहाली को देखकर मन करता है कि घर में ही रहे। लेकिन पापी पेट का सवाल है। रोजगार के लिए घर से निकलना ही पड़ता है। इसी तरह अब्दुल साह, संजीव कुमार का रोना इसी तरह का है।

