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    Home » समाज से अस्पृश्यता का उन्मूलन: अम्बेडकर के कार्यो की प्रासंगिकता
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    समाज से अस्पृश्यता का उन्मूलन: अम्बेडकर के कार्यो की प्रासंगिकता

    News DeskBy News DeskOctober 27, 2021No Comments2 Mins Read
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    समाज से अस्पृश्यता का उन्मूलन: अम्बेडकर के कार्यो की प्रासंगिकता

    झारखण्ड केंद्रीय विश्वविद्यालय के राजनीति एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग ने ऑनलाइन व्याख्यान श्रृंखला के क्रम में “समाज से अस्पृश्यता का उन्मूलन: अम्बेडकर के कार्यो की प्रासंगिकता” विषय पर आयोजित किया। जिसमें वक्ता के रूप में बुर्ला नैक कॉलेज, सम्भलपुर यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर प्रियदर्शिनी साहू उपस्थित रही। व्याख्यान उद्घाटन में विभागाध्यक्ष तथा डीन डॉ आलोक कुमार गुप्ता ने बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर के अस्पृश्यता पर अपने विचार रखे।
    तत्पश्चात व्याख्यान को आगे बढ़ाते हुए डॉ साहू ने कहा कि अम्बेडकर अपने जीवन में हमेशा आर्थिक स्वतंत्रता से पहले सामाजिक स्वतंत्रता को प्रधानता देते हुए, स्वतंत्रता संग्राम में स्वतंत्रता के लक्ष्य को हासिल करने की प्राथमिकता दी है।
    स्वतंत्रता, समानता तथा भाई चारा उनके प्रमुख विचार हैं। जो उनके पूरे जीवन काल का सार रहा है। जिसमें उन्होंने बताया है कि भेद भाव से ऊपर उठकर सबसे बड़ी चीज मानवता है। सभी को समानता एवं एक जैसा अवसर मिलना चाहिए। डॉ साहू ने सामाजिक न्याय पर बोला कि समाज के निचले तबके को भी न्याय मिले। उन्होंने अस्पृश्यता को दूर करने के लिए शिक्षा को सबसे बड़ा शस्त्र बताया है तथा संविधान में अनुच्छेद 14 से 16 तक समाजिक समानता तथा अवसर की बात कही है। डॉ साहू ने अनुच्छेद 29 के बारे में बताते हुए कहा कि किसी भी संस्था में किसी भी नागरिक को प्रवेश मिल सकता है। उसे धर्म, जाती तथा भाषा के आधार पर उसे रोका नही जा सकता है, अगर ऐसा होता है तो ये उसके मूल अधिकारों का हनन है।
    व्याख्यान के अंत में धन्यवाद ज्ञापन, व्याख्यान श्रृंखला की संयोजिका डॉ. अपर्णा ने दिया। विभाग के शिक्षक डॉ विभूति भूषण विश्वास, डॉ सुभाष कुमार बैठा, डॉ देवेंद्र विश्वाल, डॉ मुबारक अली, शोधार्थी रवि कुमार, दीपांकर डे, अमित सिंह एवं अलग-अलग विभागों के छात्र जुड़े रहे।

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