विकास के नाम पर आफत: 4 करोड़ की केबलिंग से जादूगोड़ा की सड़कें बनीं मौत का जाल
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जादूगोड़ा:विकास के नाम पर हो रहा काम आम जनता के लिए अभिशाप बन गया है। यूसिल हॉस्पिटल चौक से लेकर राखा कॉपर जियाडा सब स्टेशन तक 4 करोड़ की लागत से की जा रही अंडरग्राउंड केबलिंग में ठेकेदार विवेक कुमार सिंह की घोर लापरवाही से पूरे क्षेत्र में आक्रोश है।
काम के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति, सुरक्षा के नाम पर शून्य और जवाबदेही के नाम पर चुप्पी। नतीजा: सड़कें गड्ढों में तब्दील, सरकारी संपत्ति ध्वस्त और आम लोग चोटिल।
रात में दिखते नहीं गड्ढे, दिन में लगती चोट
पूरे रूट पर जगह-जगह सड़क किनारे गहरे गड्ढे खोद दिए गए हैं। न कोई बेरीकेटिंग, न कोई संकेतक। रात में राहगीरों को गड्ढे दिखते ही नहीं और आए दिन लोग गिरकर घायल हो रहे हैं। बरसात में मुख्य सड़क पर कीचड़ और फिसलन के कारण हादसों का खतरा और बढ़ गया है। मिट्टी सड़क पर फैलने से आवागमन भी बाधित हो रहा है।

सड़क किनारे बड़े-बड़े पाइप खुले छोड़ दिए गए हैं। कई जगह पुरानी अंडरग्राउंड केबल भी काट दी गई है। जानलेवा स्थिति के बावजूद ठेकेदार को कोई फर्क नहीं पड़ रहा।
पंचायत की संपत्ति को नुकसान, मुखिया आक्रोशित
सबसे गंभीर मामला दक्षिणी ईचडा पंचायत भवन के सामने आया। यहां बिना अनुमति के पक्के चबूतरे को तोड़कर गड्ढा कर दिया गया। पंचायत मुखिया माला गुप्ता ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा,
“ठेकेदार ने पंचायत से किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली। यह सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना है। हाल में बना चबूतरा अब दोबारा बनाना भी मुश्किल होगा। हम प्रशासन को लिखित शिकायत कर ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे।”
यात्रियों और व्यापारियों की भी बढ़ी परेशानी
यूसिल बस स्टैंड के सामने पेवर्स ब्लॉक उखाड़कर छोड़ दिए गए हैं। इससे रोजाना सैकड़ों यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। जादूगोड़ा चैंबर ऑफ कॉमर्स ने भी ठेकेदार की मनमानी पर नाराजगी जताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि सुरक्षा नियमों को पूरी तरह तार-तार कर मनमर्जी से काम चल रहा है।

सवालों के घेरे में सिस्टम
4 करोड़ की योजना जनता की सुविधा के लिए थी, लेकिन लापरवाही के कारण यह लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि जब बुनियादी सुरक्षा तक नहीं दी जा रही, तो काम की गुणवत्ता का क्या होगा?
अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
बहरहाल विकास तब सार्थक है जब वह आम आदमी की जान और सुविधा को पहले रखे। जादूगोड़ा में हो रहा यह काम उस कसौटी पर पूरी तरह फेल है।

