Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » ग्रह का किसी एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने की क्रिया को गोचर कहते
    Headlines धर्म

    ग्रह का किसी एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने की क्रिया को गोचर कहते

    Devanand SinghBy Devanand SinghJune 5, 2021No Comments5 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    राशि चक्र में ग्रह का किसी एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने की क्रिया को गोचर कहते हैं. ज्योतिष विज्ञान के अनुसार राशि चक्र में बारह राशियाँ होती हैं और इन सभी राशियों का अलग-अलग स्वभाव होता है. जबकि ग्रहों को इन राशियों का स्वामित्व प्राप्त है. किसी व्यक्ति के जीवन में गोचर का बहुत प्रभाव पड़ता है, क्योंकि गोचर उस समय विशेष में ग्रह के प्रभाव को परिभाषित करता है.

    गोचर का अर्थ होता है – ग्रहों का चलना. यह दो शब्दों के योग से बना है जिसमें पहला शब्द ‘गो’ है और दूसरा ‘चर’ है. ‘गो’ का अर्थ तारा या नक्षत्र से है जबकि ‘चर’ का मतलब गमन से है. गोचर के दौरान सूर्य से लेकर केतु तक सभी नौ की गति अलग-अलग होती है, इस कारण गोचर की अवधि में भी भिन्नता पाई जाती है.

    ज्योतिष में गोचर का महत्व क्या है?

    ज्योतिष एक ऐसी विद्या है जिसके माध्यम से आकाश मंडल में स्थित ग्रह तथा नक्षत्रों की स्थिति एवं चाल का अध्ययन कर उनके प्रभावों के बारे में जाना जाता है. इसी को ज्योतिषीय फलादेश अथवा गोचर का फल कहते हैं. इसमें महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्रह तथा नक्षत्रों का प्रभाव सीधे मनुष्य के जीवन पर पड़ता है. किसी जातक की जन्म कुंडली के आधार पर विभिन्न ग्रहों के गोचरों के प्रभावों को जाना जाता है. इसे गोचल कुंडली फलादेश भी कहते हैं. गोचर का प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुंडली में स्थित भावों के अनुसार अलग-अलग होता है. हमारी जन्म कुंडली में कुल बारह भाव होते हैं जिनसे व्यक्ति के संपूर्ण जीवन का पता चलता है.

    राशि पर ग्रहों के गोचर की अवधि

    ग्रह अवधि
    सूर्य एक माह
    चंद्रमा सवा दो दिन
    मंगल क़रीब डेढ़ माह
    बुध लगभग 14 दिन
    बृहस्पति एक वर्ष
    शुक्र लगभग 23 दिन
    शनि दो से ढ़ाई वर्ष
    राहु एक से डेढ़ वर्ष
    केतु एक से डेढ़ वर्ष

    आइए जानते हैं विभिन्न भावों पर ग्रहों के गोचर का प्रभाव :-

    सूर्य का गोचर

    वैदिक ज्योतिष में सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है. सूर्य सिंह राशि का स्वामी होता है. यह सभी ग्रहों में प्रधान है. हमारी जन्म कुंडली में सूर्य का गोचर लग्न राशि से तीसरे, छठे, दसवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल देता है जबकि शेष भावों में सूर्य का फल अशुभ देता है.

    चंद्रमा का गोचर

    ज्योतिष में चंद्र ग्रह को मन का कारक माना गया है. यह कर्क राशि का स्वामी होता है. चंद्रमा का गोचर जन्म कुंडली में लग्न राशि से पहले, तीसरे, सातवें, दसवें, और ग्यारहवें भाव में शुभ फल देता है. जबकि चौथे, आठवें और बारहवें भाव में चंद्रमा के गोचर का प्रभाव अशुभ होता है.

    मंगल का गोचर

    वैदिक ज्योतिष के अनुसार मंगल ऊर्जा, साहस, बल आदि का कारक होता है. यह मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी होता है. मंगल का गोचर किसी जातक के जन्मकालीन राशि से तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में शुभ फल देता है जबकि शेष भावों में इसके प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिलते हैं.

    बुध का गोचर

    वैदिक ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, तर्क, सवाद और गणित का कारक माना जाता है. यह मिथुन और कन्या राशि का स्वामी होता है. ज्योतिष विज्ञान के अनुसार बुध का गोचर हमारी जन्म कुंडली स्थित लग्न राशि से दूसरे, चौथे, छठे, आठवें, दसवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल देता है. जबकि शेष भावों में इसके परिणाम अच्छे नहीं माने जाते हैं.

    बृहस्पति का गोचर

    वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को ज्ञान, संतान एवं परिवार का कारक माना जाता है. यह धनु और मीन राशि का स्वामी होता है. गुरु का गोचर जन्मकालीन राशि से दूसरे, पाँचवें, सातवें, नौवें और ग्यारहवें भाव में शुभ फल देता है और शेष भावों में इसके परिणाम अशुभ होते हैं.

    शुक्र का गोचर

    वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्र ग्रह प्रेम, रोमांस, सुंदरता, कला, रिलेशनशिप का कारक होता है. यह वृषभ और तुला राशि का स्वामी होता है. शुक्र का गोचर जन्मकालीन राशि से पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे, पाँचवें, आठवें, नौवें, ग्यारहवें और बारहवें भाव में शुभ फल देता है जबकि शेष भावों में यह अशुभ फल देता है.

    शनि का गोचर

    हिन्दू ज्योतिष में शनि ग्रह को कर्म का कारक माना जाता है. यह मकर और कुंभ राशि का स्वामी होता है. शनि अपने न्याय और धीमी चाल के लिए जाना जाता है. ज्योतिष में शनि का गोचर सबसे प्रभावशाली होता है. यह जन्मकालीन राशि से तीसरे, छठे, ग्यारहवें भाव में शुभ फल देता है और शेष भावों में इसके परिणाम जातकों के लिए अशुभ होते हैं.

    राहु का गोचर

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु जीवन में चतुरता, सूचना, तकनीकी और राजनीति आदि को प्रदर्शित करता है. यह हमेशा लोगों का ध्यान अपनी ओर चाहता है और सभी प्रकार की भौतिक सुख-सुविधाओं को भोगने की ओर लालायित करता है. राहु का गोचर जन्म कुंडली में जन्मकालीन राशि से तीसरे, छठे, ग्यारहवें भाव में शुभ फल देता है और शेष भावों में इसके परिणाम व्यक्ति के लिए प्रतिकूल होेते हैं.

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleमॉरीशस के पूर्व राष्ट्रपति अनिरुद्ध जगन्नाथ के निधन पर भारत में एक दिन का राजकीय शोक, राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा
    Next Article फेसबुक ने दो साल के लिए US के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप का अकाउंट सस्पेंड किया

    Related Posts

    हजारीबाग: 70 लाख की अवैध अंग्रेजी शराब जब्त, बिहार तस्करी का बड़ा खुलासा, ट्रक चालक गिरफ्तार

    June 27, 2026

    एस.डी.एस.एम. स्कूल फॉर एक्सीलेंस में ‘बोर्ड अचीवर्स डे’ का आयोजन, मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान

    June 27, 2026

    पोटका में मलेरिया पर विधायक संजीव सरदार का एक्शन , सीएचसी और प्रभावित गांवों का किया दौरा

    June 27, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    अभी-अभी

    हजारीबाग: 70 लाख की अवैध अंग्रेजी शराब जब्त, बिहार तस्करी का बड़ा खुलासा, ट्रक चालक गिरफ्तार

    एस.डी.एस.एम. स्कूल फॉर एक्सीलेंस में ‘बोर्ड अचीवर्स डे’ का आयोजन, मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान

    पोटका में मलेरिया पर विधायक संजीव सरदार का एक्शन , सीएचसी और प्रभावित गांवों का किया दौरा

    उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय भरत तिवारी के परिजनों से मिलने पहुंचे

    मानसून से पहले रेलवे की बड़ी तैयारी, कोल्हान के स्टेशनों पर जलजमाव रोकने के लिए ड्रेनेज व्यवस्था मजबूत

    प्रमोद कुमार तिवारी को असेंबली ऑफ ह्यूमन राइट्स एंड जस्टिस का कोल्हान क्षेत्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया

    आईटीसी ग्रैंड भारत में मीडिया काउंसिल ऑफ जर्नलिस्ट का राष्ट्रीय अधिवेशन, जिम्मेदार पत्रकारिता पर जोर

    पूर्वांचल की बंद पड़ी गणेश शुगर मिल को पुनर्जीवित करने की मांग तेज

    आज फिर आठ छात्रा हुई बीमार परिजनों ने किया हंगामा

    पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता ने स्व. काशीनाथ सिंह के परिजनों से मिलकर जताई शोक संवेदना

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.