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    Home » उत्तर प्रदेश में कई जिलों की बिजली गुल, निजीकरण के विरोध में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर गए बिजली कमी
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    उत्तर प्रदेश में कई जिलों की बिजली गुल, निजीकरण के विरोध में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर गए बिजली कमी

    Devanand SinghBy Devanand SinghOctober 7, 2020No Comments2 Mins Read
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    लखनऊ. उत्तर प्रदेश में कई शहरों की बिजली गुल है और ऐसे में इन शहरों के लोगों की मुसीबतें लगातार बढ़ती जा रही है. दरअसल, यूपी में बिजली विभाग के निजीकरण किए जाने के प्रस्ताव के विरोध में सूबे के 15 लाख से ज्यादा कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल पर हैं.

    कर्मचारियों की हड़ताल का असर ऐसा था कि पूर्वांचल के एक बड़े हिस्से में सारी रात बिजली की आपूर्ति नहीं हो सकी. वहीं राजधानी लखनऊ में उप मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री समेत कुल 36 मंत्रियों सहित हजारों घरों में पावर सप्लाई का काम नहीं हो सका.

    पूर्वांचल विद्युत विरतण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) के निजीकरण को लेकर उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन प्रबंधन और बिजली कर्मियों के बीच पाला खिंच गया है. निजीकरण के विरोध में आंदोलनरत कर्मियों की चेतावनी के बावजूद समझौते का कोई रास्ता नहीं निकला और सोमवार को कर्मचारी अनिश्चितकालीन पूर्ण कार्य बहिष्कार पर चले गए. इस प्रदेशव्यापी आंदोलन से पूर्वी उत्तर प्रदेश के वाराणसी, देवरिया, गोरखपुर, चंदौली, आजमगढ़, मऊ, मीरजापुर समेत कई जिलों की बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है. इस कारण उपभोक्ताओं की शिकायतें नहीं सुनी गई और अन्य काम भी प्रभावित रहे.

    निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने सोमवार पूरे दिन कार्य बहिष्कार किया. कार्य बहिष्कार के पहले दिन सोमवार को ही सरकार की तैयारियां धरी रह गईं. कंट्रोल रूम फेल तो विद्युत आपूर्ति सुचारु बनाए रखने के लिए लगाई गई भारी भरकम टीम फाल्ट दुरुस्त करना तो दूर बहुतायत क्षेत्रों में इसे ढूंढ़ पाने में ही असफल रही. इसका फायदा बिजली कर्मियों ने उठाया और प्रशासनिक व्यवस्था को खूब छकाया.

    फॉल्ट की मरम्मत सहित उपभोक्ता सेवाओं से जुड़े कामकाज प्रभावित रहे. इस बीच ऊर्जा प्रबंधन और जिला प्रशासन ने बिजली सप्लाई बहाल रखने के लिए पुलिस के पहरे के साथ कई वैकल्पिक इंतजाम किए, लेकिन फॉल्ट के आगे सभी फेल हो गए. राज्य के कई जिलों में आपूर्ति ठप रही. लोगों को बिजली-पानी के लिए परेशान होना पड़ा.

    पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के निजीकरण के ऊर्जा निगम प्रबंधन के फैसले के विरोध में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले सभी बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों और अभियंताओं ने उत्तर प्रदेश के सभी जिलों और परियोजनाओं पर अनिश्चितकालीन पूर्ण कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है.

    संघर्ष समिति का दावा है कि उसके समर्थन में केरल, तमिलनाडु, कनार्टक, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, लद्दाख, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल सहित अन्य प्रांतों के कुल 15 लाख बिजलीकर्मियों ने भी कार्य बहिष्कार किया.

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