लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
बखरी थाना क्षेत्र के राटन पंचायत में नदी में डूबने से 12 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई है, जिससे पूरे इलाके में मातम पसर गया है। मृतक की पहचान वार्ड नंबर-07 निवासी आदित्य कुमार, पिता राजीव महतो के रूप में हुई है। यह दर्दनाक हादसा दोपहर बाद का बताया जा रहा है जब बच्चा खेलने के क्रम में नदी की ओर चला गया था।
नदी में डूबने से 12 वर्षीय बच्चे की मौत: घटना का पूरा विवरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आदित्य कुमार मंगलवार दोपहर करीब 1 बजे अपने घर से अचानक लापता हो गया। परिजनों ने आस-पड़ोस और रिश्तेदारों के यहां काफी खोजबीन की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। परिवार की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। ग्रामीणों की मदद से तलाशी अभियान तेज किया गया।
काफी मशक्कत के बाद शाम लगभग 5 बजे बभाइन स्थित उसके अपने ही डेरा के पास नदी से बच्चे का शव बरामद हुआ। शव मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई। मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना स्थानीय थाना पुलिस को दी।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
घटना के बाद मृतक के घर पर कोहराम मचा हुआ है। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार बेहोश हो जा रहे हैं। पड़ोसी और रिश्तेदार उन्हें संभालने में लगे हैं। मां बार-बार यही कह रही है कि मेरा बेटा मुझे छोड़कर कहां चला गया। पिता राजीव महतो सदमे में हैं और कुछ बोलने की स्थिति में नहीं हैं। पूरे गांव में शोक का माहौल व्याप्त है। किसी के घर चूल्हा नहीं जला।
ग्रामीणों ने दिखाई तत्परता, प्रशासन को दी सूचना
ग्रामीणों ने बताया कि नदी किनारे सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है और किनारे कटाव होने से गहरे गड्ढे बन गए हैं। इसी गड्ढे में डूबने से बच्चे की जान चली गई। ग्रामीणों ने मांग की है कि नदी किनारे घाटों पर बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। बखरी थानाध्यक्ष ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। यूडी केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
बिहार में बढ़ रहीं डूबने की घटनाएं, जागरूकता जरूरी
बिहार में मानसून के दौरान नदियों, तालाबों और गड्ढों में डूबने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तैराकी का प्रशिक्षण और जागरूकता अभियान चलाकर इन हादसों को रोका जा सकता है। बिहार में डूबने की घटनाओं पर विशेष रिपोर्ट के अनुसार हर साल सैकड़ों बच्चे असमय काल के गाल में समा जाते हैं। प्रशासन को स्कूल स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाने चाहिए।
राटन पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि ने पीड़ित परिवार को हर संभव सरकारी सहायता दिलाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन विभाग से अनुग्रह अनुदान राशि दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गांव के बुजुर्गों ने कहा कि आदित्य बहुत ही मिलनसार और पढ़ने में तेज बच्चा था। उसकी मौत पूरे समाज के लिए अपूरणीय क्षति है।
