लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
बिहार के बेगूसराय जिले में कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के लिए वासंतिक रबी महाअभियान की शुरुआत की गई है। इसी कड़ी में सोमवार को प्रखंड मुख्यालय स्थित कर्पूरी सभागार में एक भव्य प्रखंड स्तरीय प्रशिक्षण सह उपादान वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को रबी फसलों की उन्नत खेती और सरकारी अनुदानों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर प्रखंड प्रमुख संजू देवी, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. विपिन, प्रखंड कृषि पदाधिकारी रश्मि कुमारी, आत्मा अध्यक्ष विनोद महतो एवं प्रखंड जदयू अध्यक्ष नवीन कुमार छोटू उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन प्रखंड तकनीकी प्रबंधक रजनी रानी द्वारा किया गया, जिन्होंने उपस्थित किसानों का स्वागत किया और सत्र की रूपरेखा प्रस्तुत की।
वासंतिक रबी महाअभियान और सरकारी योजनाओं का लाभ
इस प्रशिक्षण शिविर के दौरान कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न लाभकारी योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने किसानों को आत्मा योजना, किसान पाठशाला, किसान गोष्ठी एवं प्रत्यक्षण कार्यक्रमों के उद्देश्यों के बारे में विस्तार से बताया। किसानों को समझाया गया कि कैसे ये योजनाएं उनकी आय बढ़ाने और खेती की लागत को कम करने में सहायक हो सकती हैं।
प्रखंड कृषि पदाधिकारी (BAO) रश्मि कुमारी ने कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों से अपील की कि वे सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए कई सब्सिडी और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है, जिसका लाभ उठाकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं।
जैविक खेती और मिट्टी संरक्षण पर जोर
कार्यक्रम के दौरान केविके खोदावंदपुर के वैज्ञानिक डॉ. विपिन ने किसानों को पारंपरिक रासायनिक खेती के बजाय जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रसायनों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम हो रही है, जिसे बचाना अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. विपिन ने खेतों की उर्वरा शक्ति बनाए रखने तथा मिट्टी के संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने ‘खेत बचाओ अभियान’ के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि कैसे जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों के प्रयोग से न केवल फसल की गुणवत्ता सुधरती है, बल्कि पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की भी रक्षा होती है। किसानों को मिट्टी परीक्षण कराने की सलाह दी गई ताकि वे अपनी जमीन की जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों का प्रबंधन कर सकें।
कृषि क्षेत्र में आधुनिक बदलावों के बारे में अधिक जानकारी के लिए आप भारतीय कृषि मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं, जहाँ फसलों के प्रबंधन और सरकारी दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध है।
इस महाअभियान के तहत किसानों को बीज, खाद और अन्य आवश्यक कृषि उपकरणों का वितरण भी किया गया। विशेषज्ञों ने किसानों को रबी सीजन में गेहूं, सरसों और दलहन की फसलों के लिए उन्नत किस्म के बीजों के उपयोग की सलाह दी। कार्यक्रम के अंत में एक प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें किसानों ने अपनी समस्याओं को साझा किया और विशेषज्ञों से उनके समाधान प्राप्त किए।
कुल मिलाकर, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध हुआ। इस पहल से न केवल किसानों का ज्ञानवर्धन हुआ, बल्कि उन्हें सीधे तौर पर कृषि विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों से संवाद करने का अवसर मिला, जिससे भविष्य में खेती की उत्पादकता बढ़ने की प्रबल संभावना है।

