तुरामडीह में वर्षों से जमे अधिकारियों पर कब चलेगी रोटेशन पॉलिसी? 1.39 करोड़ के वर्क ऑर्डर पर भी सवाल
सतीश सिंह ने जिला प्रशासन से प्रधानमंत्री कार्यालय तक की शिकायत, नए तकनीकी निदेशक सलिल कुमार नाग के सामने निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की चुनौती
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देवानंद सिंह
जादूगोड़ा/तुरामडीह। यूसीआईएल की तुरामडीह माइंस में 1.39 करोड़ रुपये से अधिक के भूमिगत सिविल कार्यादेश को लेकर उठे सवालों ने प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि भूमिगत कार्य के नाम पर जारी वर्क ऑर्डर के तहत सड़क, ग्रेडिंग, बैरिकेडिंग और शेड निर्माण जैसे सतही कार्य कराए गए। वहीं, कुछ अधिकारियों के पांच से सात वर्षों या उससे अधिक समय से एक ही स्थान पर जमे रहने के आरोप ने रोटेशन पॉलिसी के पालन पर भी सवाल खड़ा कर दिया है।
*सतीश सिंह ने जिला प्रशासन से पीएमओ तक की शिकायत, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?*
पूर्व भाजपा नेता सतीश सिंह ने इस मामले में जिला प्रशासन से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत कर निष्पक्ष जांच की मांग की है। 24 नवंबर 2025 को वर्क ऑर्डर संख्या GEMC-511687761339113 के तहत मेसर्स अजय कुमार गुप्ता को ₹1,39,70,190.19 का कार्यादेश जारी किए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में प्रबंधक मनोज कुमार मिश्रा की निगरानी और कार्यों के निष्पादन की जांच की मांग भी की गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मामले में शिकायतें की जा चुकी हैं, तो अब तक जांच और कार्रवाई की स्थिति क्या है? क्या शिकायतों पर नियमानुसार जांच हुई, या फाइलें दफ्तरों में ही दबकर रह गईं? आखिर किस स्तर पर कार्रवाई रुकी है, इसकी निष्पक्ष पड़ताल जरूरी है।
वर्षों से एक ही जगह तैनाती, रोटेशन पॉलिसी कहां?
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ अधिकारी वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात हैं। इसे लेकर ठेका आवंटन में पक्षपात, बार-बार उन्हीं ठेकेदारों को काम मिलने तथा बीओक्यू (BOQ) और मेजरमेंट बुक (MB) में संभावित अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच अभी जरूरी है।
सवाल यह है कि यदि रोटेशन पॉलिसी लागू है, तो लंबे समय से एक ही पद पर तैनात अधिकारियों की समीक्षा क्यों नहीं हुई? क्या तुरामडीह में नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं, या कुछ अधिकारियों को विशेष संरक्षण प्राप्त है?
नए तकनीकी निदेशक सलिल कुमार नाग के सामने अग्निपरीक्षा
यूसीआईएल के नए तकनीकी निदेशक सलिल कुमार नाग के सामने अब पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की चुनौती है। उनसे अपेक्षा है कि 1.39 करोड़ रुपये के कार्यादेश सहित पिछले तीन वर्षों के संबंधित भूमिगत कार्यादेशों की स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए। बीओक्यू, मटेरियल इश्यू रजिस्टर, स्टॉक रजिस्टर और मस्टर रोल का मिलान कर वास्तविक कार्यों की स्थिति स्पष्ट की जाए।
साथ ही, लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात अधिकारियों की स्थिति और रोटेशन संबंधी नियमों के अनुपालन की समीक्षा भी होनी चाहिए।
अब बड़ा सवाल यही है क्या नए तकनीकी निदेशक इस मामले में निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदारी तय करेंगे, या तुरामडीह में शिकायतों और सवालों का सिलसिला यूं ही जारी रहेगा? यूसीआईएल प्रबंधन की पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए जरूरी है कि आरोपों की जांच तथ्यों के आधार पर हो और दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

